ग्लोबल वार्मिंग का असर अब शिमला शहर में भी नजर आने लगा है। आइस स्केटिंग रिंक शिमला में इस बार स्केटिंग करीब 30 दिन पहले ही बंद हो गई। स्केटिंग रिंक से बर्फ पूरी तरह पिघल चुकी है। बीते साल 22 फरवरी तक स्केटिंग के सत्र चले थे। इस बार 23 जनवरी तक ही स्केटिंग हो सकी।
शिमला आइस स्केटिंग रिंक में इस साल पूरे सीजन में सिर्फ 35 सत्र हुए। बीते साल 52 सत्र स्केटिंग के हुए थे। दिन में जिस तरह से धूप खिल रही है उससे शायद ही अब आइस स्केटिंग रिंक में बर्फ जम पाए। आइस स्केटिंग रिंक में जमी बर्फ पानी में बदल चुकी है।
रिंक में पानी के तालाब बन गए हैं। स्कूल और कॉलेजों के खुलने का समय भी नजदीक है। इससे रिंक में अब फिर रौनक लौटने के आसार कम हैं। इस बार राजधानी शिमला में बर्फ भी सिर्फ दो बार ही गिरी है लेकिन यह नाममात्र ही रही। एक माह पूर्व फरवरी में ही मार्च माह जैसा मौसम बनने लगा है।
शिमला आइस स्केटिंग क्लब के पूर्व महासचिव भवनेश बांगा, वर्तमान सचिव मनप्रीत सैंबी और संगठन सचिव पंकज का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन का असर है। फरवरी में अब स्केटिंग के लिए बर्फ शायद ही जम पाए।
2017 में हुए थे सबसे कम 11 स्केटिंग सत्र
शिमला आइस स्केटिंग रिंक में 2016-17 में सबसे कम 11 स्केटिंग हुए थे, 2013-14 में 28 सत्र हुए थे। इसके अलावा 2015-16 में 36 और अब 2022-23 में पूरे सीजन में 35 स्केटिंग के सत्र हो पाए हैं। इसके अलावा एक दशक में 2011-12 में सबसे अधिक 88 सत्र हुए थे।