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संतरे का कारोबार छोड़कर उगाया सेब, अब खरीदी 1.40 करोड़ की रेंज रोवर

Tue, 29 Jan 2019 12:21 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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मशहूर सेब बागवान रामलाल चौहान ने अनगिनत पहाड़ी युवाओं को सपने दिखाए। चौहान कहते रहे - ‘नौकरी भूल जाओ, अपना काम करो। अच्छी किस्म का सेब उगाओ, सपने पूरे होंगे।’ हिमाचल के कई नौजवान रामलाल चौहान के नक्शेकदम पर चले, वे अब अमीर बनकर औरों को नौकरी देने लग गए हैं।

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जहां देश भर में लोग खेती छोड़ रहे हैं, हिमाचल के युवा सब कुछ छोड़कर बागवानी की ओर मुड़ रहे हैं। इसके लिए रामलाल चौहान प्रेरक बने हैं। महाराष्ट्र में संतरे के कारोबारी के पास कमीशन एजेंट का काम करने वाले रामलाल चौहान ने हाल ही में एक करोड़ 40 लाख रुपये खर्च कर रेंज रोवर कार खरीदी है। इसमें 47 लाख रुपये आयात शुल्क, टैक्स, पंजीकरण और बीमा के  चुकता किए हैं।

शिमला शहर से 55 किलोमीटर दूर बखोल पंचायत में ही ढांगवी गांव के निवासी रामलाल चौहान के दो बगीचे हैं। मकान ऐसे बनाए हैं, जैसे किसी राजा के महल हों। 60 वर्षीय चौहान की सेब बागवानी से सालाना आमदनी एक करोड़ रुपये से ज्यादा है।

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वह बैंकों में जमा पर लाखों रुपये टैक्स देते हैं। चौहान ने बताया कि 1981 से लेकर 1997 तक उन्होंने महाराष्ट्र में संतरा कारोबारी के साथ कमीशन एजेंट के रूप में काम शुरू किया। इस काम से गुजारा भर होता था। 1997 में सब छोड़कर अपने गांव लौटे। उनके सात भाई होने के कारण हिस्से में 10 बीघा जमीन ही आई।

उन्होंने पुरानी किस्मों के कम पैदावार करने वाले सेब के पेड़ काटकर इनके ऊपर हाई कलर किस्मों की टॉप ग्राफ्टिंग की। मार्केटिंग का अनुभव पहले से ही था। सेब बगीचे में बड वुड बैंक भी बनाया। ग्राफ्टिंग के लिए लोग उनसे बडवुड खरीदकर ले जाने लगे। सैकड़ों पुरस्कार पा चुके चौहान को हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन वर्ष 2011 में फार्मर ऑफ  द ईयर्स अवार्ड दे चुके हैं।

उन्हें जमशेदजी टाटा फेलोशिप भी मिली है। चौहान सेब और नाशपाती की दर्जनों किस्मों पर काम कर रहे हैं। लगभग 50 बीघा में की जा रही सेब बागवानी में उनके भाई मोतीलाल चौहान भी सहायता करते हैं। रामलाल यूएसए की वैनवैल नर्सरी में एक सप्ताह का प्रशिक्षण ले चुके हैं। अमेरिका, चीन, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी समेत एक दर्जन देशों में सेब बागवानी की आधुनिक तकनीक सीख चुके हैं।
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