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हिमाचल: शिमला के खलीणी में वन विभाग परिसर में दुकान खोलने के मामले की CID जांच, विजिलेंस जांच की भी सिफारिश

Sun, 02 Aug 2026 06:00 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

खलीणी स्थित वन विभाग के कार्यालय परिसर में सब्जी और राशन की दुकान खोलने के मामले में सीआईडी की इंटेलिजेंस शाखा ने प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो से विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है। जांच में अनुमति प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और सरकारी परिसर के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े नियमों की जांच की गई। पढ़ें पूरी खबर...
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खलीनी में वन विभाग के कार्यालय में खोल दी सब्जी और अन्य सामान की दुकानें। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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खलीणी स्थित मिस्ट चैंबर में वन विभाग के कार्यालय परिसर में सब्जी और राशन की दुकान खोलने के मामले में सीआईडी की इंटेलिजेंस शाखा ने प्रारंभिक जांच की है। प्रारंभिक छानबीन में सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने मामले की विजिलेंस ब्यूरो से भी जांच करवाने की सिफारिश की है। सीआईडी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने के साथ विजिलेंस ब्यूरो को भी सौंपी गई है।

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मामला वन विभाग के कार्यालय परिसर में व्यावसायिक गतिविधि शुरू किए जाने से जुड़ा है। सरकारी भवन और कार्यालय परिसर का उपयोग सामान्य तौर पर विभागीय कार्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में परिसर में सब्जी और राशन की दुकान खोलने को लेकर अनुमति, नियमों और प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। इसके बाद मामले में सीआईडी की इंटेलिजेंस शाखा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की प्रारंभिक छानबीन की।

सीआईडी ने प्रारंभिक जांच के दौरान दुकान खोलने की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों और विभागीय प्रक्रिया की पड़ताल की। जांच में यह देखा गया कि दुकान खोलने की अनुमति किस स्तर से दी गई, इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी ली गई या नहीं और सरकारी परिसर के व्यावसायिक उपयोग के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।

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प्रारंभिक जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो से भी मामले की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की गई है। विजिलेंस ब्यूरो के स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई अथवा विस्तृत जांच को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।

मामले में यह भी देखा जा सकता है कि दुकान के लिए परिसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया क्या थी। इसके बदले किराया या शुल्क निर्धारित कितना तय हुआ। यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी संपत्ति के उपयोग से संबंधित विभागीय नियमों का पालन हुआ या नहीं। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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