फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: आबकारी विभाग के 558 करोड़ डूबे, तीन साल में वसूली सिर्फ 62 करोड़, विधानसभा में रखा आंकड़ा

Fri, 04 Sep 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 प्रदेश के आबकारी विभाग के सामने 558.50 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विभाग 62.11 करोड़ रुपये ही वसूल कर पाया है।
विज्ञापन
राज्य कर एवं आबकारी विभाग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के आबकारी विभाग के सामने 558.50 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विभाग 62.11 करोड़ रुपये ही वसूल कर पाया है। विधानसभा में विधायक संजय अवस्थी के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार ने दावा किया है कि बकायादारों से रकम वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। सरकार ने अब बकाया वसूलने के लिए केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम 1954 के तहत बकायादारों के खिलाफ डिमांड रिट जारी की जा रही हैं।

विज्ञापन


संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भी भेजे जा रहे हैं। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने और जरूरत पड़ने पर उसकी नीलामी करने तक कार्रवाई की जा रही है। बकायादारों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने दूसरे सरकारी विभागों से भी सहयोग मांगा है। विभागों को कहा गया है कि राज्य कर एवं आबकारी विभाग की एनओसी के बिना संबंधित बकायादारों को कोई काम आवंटित न किया जाए। ऐसे बकायादारों का कोई भुगतान भी जारी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की कार्रवाई का एक उदाहरण कांगड़ा जोन के शाहपुर में सामने आया, जहां एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन की नीलामी की गई। इससे सरकार को 2.51 लाख रुपये की वसूली हुई। इसके अलावा दो अन्य मामलों में डिफाल्टरों से कुल 27 लाख रुपये वसूल किए गए हैं।

विज्ञापन

एक ही दफ्तर में अलग-अलग महंगाई भत्ता दे रही सरकार 
 प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों में कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने विधानसभा में स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा कि एचपीएसईबीएल, एचपीपीटीसीएल और एचपीपीसीएल जैसी कंपनियों में महंगाई भत्ते की अलग-अलग दरें किसी संस्थान विशेष के कारण नहीं, बल्कि कर्मचारियों की पेंशन योजना के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि यह कहना सही नहीं है कि किसी एक कंपनी के सभी कर्मचारियों को 60 फीसदी और दूसरी कंपनी के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि महंगाई भत्ते की दर कर्मचारी के एनपीएस, ओपीएस या ईपीएफ से जुड़े होने पर निर्भर करती है। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। यह लाभ वित्त विभाग की 10 अक्तूबर 2024 को जारी अधिसूचना के तहत प्रदान किया जा रहा है। राज्य के सभी पात्र एनपीएस कर्मचारियों पर यह व्यवस्था समान रूप से लागू है। वहीं पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को 45 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। यह व्यवस्था वित्त विभाग की 15 अक्तूबर 2025 की अधिसूचना के अनुरूप लागू की गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें