ठियोग निवासी शिकायतकर्ता राजेश ने आयोग को बताया कि 13 दिसंबर 2011 को जब वह अपने घर में सिलिंडर में रेगुलेटर लगा रहे थे तभी उसमें अचानक आग लग गई। हादसे में उनके छह वर्षीय बेटे सौरव की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई थी। पीड़ित का आरोप था कि उन्हें दोषपूर्ण सिलिंडर दिया था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद इंडियन ऑयल कंपनी ने उन्हें गुमराह किया और कई वर्षों तक जांच के नाम पर झूठे आश्वासन दिए जिसके कारण उन्हें अंत में आयोग में शिकायत दर्ज करनी पड़ी। इंडियन ऑयल कंपनी ने कहा कि सिलिंडर में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था, हादसा उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल की गई नॉन-स्टैंडर्ड रबर पाइप और रेगुलेटर के गलत इस्तेमाल के कारण हुआ था। साथ ही उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मामला वितरक और बीमा कंपनी का है। वहीं लोगों ने अदालत के इस फैसले की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इससे अधिकारियों की सुरक्षा होगी।
हर उपभोक्ता को मिलता है बीमा कवर, लोगों को दें जानकारी: आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि गैस कनेक्शन देते समय बीमा कवर की जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी है। गैस कनेक्शन लेते ही उपभोक्ता का बीमा हो जाता है। इस विषय पर आयोग ने इस आदेश की प्रति आईआरडीए, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को ऐसी परेशानियों से बचाया जा सके। कंपनियों को उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
गैस कनेक्शन के साथ फ्री मिलता है 50 लाख तक का बीमा: घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन लेने पर बीमा कवर उपलब्ध होता है, लेकिन यह अलग से खरीदी जाने वाली पॉलिसी नहीं होती। यह आम तौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपने अधिकृत वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए समूह बीमा व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जाता है। यदि दुर्घटना अधिकृत एलपीजी सिलिंडर, रेगुलेटर या संबंधित उपकरणों से जुड़ी हो और बीमा की शर्तें पूरी होती हों, तो इसमें आम तौर पर निम्न प्रकार के दावे शामिल हो सकते हैं:
- दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवजा
- स्थायी या आंशिक विकलांगता पर मुआवजा
- चिकित्सा खर्च
- संपत्ति को हुए नुकसान का मुआवजा (पॉलिसी की शर्तों के अनुसार)
ध्यान रखने वाली बात यह है कि:
बीमा का लाभ अधिकृत गैस एजेंसी से लिए गए वैध घरेलू कनेक्शन पर ही लागू होता है।
दावा करने के लिए दुर्घटना की सूचना समय पर गैस एजेंसी और संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक हो सकता है।
मुआवजे की राशि और शर्तें समय-समय पर बीमा पॉलिसी के अनुसार बदल सकती हैं।
यही कारण है कि शिमला के उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि गैस एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे उपभोक्ताओं को इस बीमा कवर की जानकारी दें।