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Himachal News: गैस सिलिंडर हादसे में बच्चे की मौत, उपभोक्ता आयोग ने 10 लाख रुपये बीमा क्लेम का दिया आदेश

Tue, 30 Jun 2026 11:39 AM IST
Ankesh Dogra रुचि सांख्यान, शिमला।

सार

शिमला जिला उपभोक्ता आयोग ने गैस सिलिंडर हादसे में छह वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। आयोग ने इंडियन ऑयल, गैस एजेंसी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से 10 लाख रुपये बीमा राशि और 70 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही गैस उपभोक्ताओं को बीमा कवर की जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी बताया। पढ़ें पूरी खबर...
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गैस क्नेक्शन लेने पर बीमा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने 10 साल पुराने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए गैस सिलिंडर हादसे के पीड़ित परिवार को राहत प्रदान की है। आयोग ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, गैस एजेंसी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से पीड़ित को 10,00,000 रुपये बीमा राशि और 70,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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ठियोग निवासी शिकायतकर्ता राजेश ने आयोग को बताया कि 13 दिसंबर 2011 को जब वह अपने घर में सिलिंडर में रेगुलेटर लगा रहे थे तभी उसमें अचानक आग लग गई। हादसे में उनके छह वर्षीय बेटे सौरव की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई थी। पीड़ित का आरोप था कि उन्हें दोषपूर्ण सिलिंडर दिया था। 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद इंडियन ऑयल कंपनी ने उन्हें गुमराह किया और कई वर्षों तक जांच के नाम पर झूठे आश्वासन दिए जिसके कारण उन्हें अंत में आयोग में शिकायत दर्ज करनी पड़ी। इंडियन ऑयल कंपनी ने कहा कि सिलिंडर में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था, हादसा उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल की गई नॉन-स्टैंडर्ड रबर पाइप और रेगुलेटर के गलत इस्तेमाल के कारण हुआ था। साथ ही उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मामला वितरक और बीमा कंपनी का है। वहीं लोगों ने अदालत के इस फैसले की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इससे अधिकारियों की सुरक्षा होगी।

बीमा कंपनी ने क्लेम से किया था इन्कार: नागरिक पूर्ति निगम ने तर्क दिया कि सिलिंडर के नॉब और रबर सील में तकनीकी खराबी थी जिसके लिए निर्माता कंपनी इंडियन ऑयल जिम्मेदार है। वहीं नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने दलील दी कि उन्हें हादसे की समय पर सूचना नहीं दी गई इसलिए वह क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने हादसे के लिए उपभोक्ता की लापरवाही को ही मुख्य कारण बताया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों के सभी तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि हादसे के बाद कंपनी ने पीड़ित की मदद करने के बजाय उसे कानूनी उलझनों में डाल दिया था। आयोग ने पाया कि कंपनियों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पीड़ित को अनावश्यक रूप से वर्षों तक परेशान किया है। आयोग ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि उपभोक्ता को यह पता ही नहीं था कि उसके पास बीमा कवर भी है। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

हर उपभोक्ता को मिलता है बीमा कवर, लोगों को दें जानकारी: आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि गैस कनेक्शन देते समय बीमा कवर की जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी है। गैस कनेक्शन लेते ही उपभोक्ता का बीमा हो जाता है। इस विषय पर आयोग ने इस आदेश की प्रति आईआरडीए, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को ऐसी परेशानियों से बचाया जा सके। कंपनियों को उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

गैस कनेक्शन के साथ फ्री मिलता है 50 लाख तक का बीमा: घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन लेने पर बीमा कवर उपलब्ध होता है, लेकिन यह अलग से खरीदी जाने वाली पॉलिसी नहीं होती। यह आम तौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपने अधिकृत वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए समूह बीमा व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जाता है। यदि दुर्घटना अधिकृत एलपीजी सिलिंडर, रेगुलेटर या संबंधित उपकरणों से जुड़ी हो और बीमा की शर्तें पूरी होती हों, तो इसमें आम तौर पर निम्न प्रकार के दावे शामिल हो सकते हैं:
  • दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवजा
  • स्थायी या आंशिक विकलांगता पर मुआवजा
  • चिकित्सा खर्च
  • संपत्ति को हुए नुकसान का मुआवजा (पॉलिसी की शर्तों के अनुसार)
ध्यान रखने वाली बात यह है कि:

बीमा का लाभ अधिकृत गैस एजेंसी से लिए गए वैध घरेलू कनेक्शन पर ही लागू होता है।
दावा करने के लिए दुर्घटना की सूचना समय पर गैस एजेंसी और संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक हो सकता है।
मुआवजे की राशि और शर्तें समय-समय पर बीमा पॉलिसी के अनुसार बदल सकती हैं।

यही कारण है कि शिमला के उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि गैस एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे उपभोक्ताओं को इस बीमा कवर की जानकारी दें।

बालिग को मुआवजा देने का आदेश: अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने सड़क दुर्घटना में मुआवजे की राशि जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अब बालिग हो चुका है और उसे अपनी उच्च शिक्षा के लिए धन की आवश्यकता है। के दौरान गणना की गलती के कारण मुआवजे की राशि 36,81,440 रुपये आंकी थी जोकि कम थी। वर्ष 2019 में अदालत द्वारा इस गलती को सुधारा था और इसे 52,62,08 रुपये निर्धारित किया था। बीमा कंपनी ने 14 सितंबर 2022 को 31,65,144 रुपये कोर्ट में जमा करवाए थे। इस राशि को कोर्ट ने याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। 

आरोपी को मिली अग्रिम जमानत: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट रेप/पॉक्सो) शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण के आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी है। शिमला निवासी आरोपी शैलेंद्र चौहान पर पीड़िता को शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाने के आरोप हैं। आरोपी ने पीड़िता से 20 अप्रैल 2026 को सगाई भी कर ली थी। बाद में आरोपी ने पीड़िता को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और उसके निजी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए थे। इसके बाद पीड़िता ने महिला पुलिस थाना शिमला में केस दर्ज करवाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल शादी न होने से यह साबित नहीं होता कि आरोपी की मंशा शुरुआत से ही गलत थी। 

हुंडई कंपनी को राहत, एकतरफा कार्रवाई करने का आदेश पलटा 
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग हमीरपुर की ओर से पारित एकतरफा आदेश को रद्द कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और अध्यक्ष योगिता दत्ता की खंड पीठ ने कंपनी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) पर सुनवाई करते हुए कहा कि कंपनी ने जानबूझकर गैर हाजिरी नहीं की थी बल्कि नोटिस में त्रुटि के कारण कंपनी दी तारीख पर पेश नहीं हो सकी थी। मामला नीलम पटयाल द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। हुंडई कंपनी इस मामले में विपक्षी पार्टी के रूप में शामिल थी। कंपनी का तर्क था कि उन्हें जो नोटिस मिला उसमें सुनवाई की अगली तारीख 13 नवंबर 2025 दर्ज थी लेकिन जिला आयोग का नाम कांगड़ा स्थित धर्मशाला लिखा था। इस तकनीकी त्रुटि के कारण कंपनी ने अपने वकील को धर्मशाला में पेश होने के निर्देश दिए जबकि मामला हमीरपुर जिला आयोग में लंबित था। परिणामस्वरूप इस दिन कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हो सका और हमीरपुर आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर दी थी। 
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एनडीपीएस मामले में जब्त गाड़ी मुक्त 
विशेष न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त की गई गाड़ी को रिलीज कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कांगड़ा निवासी प्रार्थी राकेश शर्मा जो गाड़ी मालिक हमीरपुर निवासी प्रदीप कुमार शर्मा के एसपीए हैं, उनकी अर्जी को स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने 27 दिसंबर 2025 को नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल करने के आरोप में गाड़ी को कब्जे में लिया था। अदालत ने राकेश शर्मा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन में लंबी अवधि तक खड़ा रखने का कोई औचित्य नहीं है। 
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