सितंबर में 83 साल के होने जा रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार खुद को मुख्यमंत्री या किसी पद की दौड़ में नहीं मानते। वह साफ कहते हैं कि उनका किसी से कोई मुकाबला नहीं है।
जो उन्हें मिलना है उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं छीन सकती। प्रदेश में सीएम प्रत्याशी घोषित किए बिना विधानसभा चुनाव लड़ने का भाजपा का फार्मूला उन्हें सही लगता है।
‘अमर उजाला’ के धर्मशाला कार्यालय में संवाददाता सुनील चड्ढा के साथ विशेष बातचीत में शांता कुमार ने धूमल और वीरभद्र के साथ अपने राजनीतिक रिश्तों समेत आगामी चुनाव पर बेबाक राय रखी। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश....
सवाल : अमित शाह ने पालमपुर दौरे के दौरान आपके और धूमल के बीच एकजुटता दिखाने की कोशिश की। क्या शाह ने वाकई में आप दोनों के दिल मिला दिए ?
जवाब : मैं भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं किसी दौड़ में नहीं हूं। पिछले विधानसभा चुनाव में जो हुआ, वह अब पुरानी बात हो गई है। मैं पीछे मुड़कर नहीं, आगे देखने वालों में से हूं। मिशन वापसी के लिए हम सब एकजुट हैं।
टिकट आवंटन पर शांता ने दिया चौंकाने वाला बयान
सवाल: हिमाचल भाजपा में गुटबाजी खत्म करने के लिए शाह ने क्या मंत्र दिया। टिकट आवंटन का क्या पैमाना होगा ?
जवाब : प्रदेश भाजपा में कोई गुटबाजी नहीं है। कार्यकर्ताओं को मालूम हो गया है कि अब टिकट बड़े नेताओं के कहने पर नहीं बल्कि अच्छी छवि और जीतने की क्षमता की कसौटी के आधार पर मिलेगा। सिटिंग एमएलए तक का टिकट पक्का नहीं है। यह संदेश हर कार्यकर्ता में चला गया है। यूपी और उत्तराखंड के चुनाव के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री के बारे में निर्णय हाईकमान ही करेगा। कौन जानता था कि योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बन जाएंगे।
सवाल : विस चुनाव में कांग्रेस वीरभद्र सिंह को फिर चेहरा बना रही है। भाजपा में अभी सीएम प्रत्याशी तय नहीं हो पाया है। सीएम उम्मीदवार तय न करना पार्टी के लिए नुकसानदायक नहीं होगा?
जवाब : इसका निर्णय हाईकमान लेगा जो सभी को स्वीकार्य होगा। यूपी और उत्तराखंड में चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था। इससे पार्टी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा हुआ। हिमाचल में चुनाव से पहले सीएम पद के लिए चेहरा घोषित न भी हो तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
सवाल : ईमानदार और स्वच्छ छवि के पैमाने पर आप फिट बैठते हैं। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद मिला तो क्या स्वीकार करेंगे?
जवाब : मैं सितंबर माह में 83 वर्ष की आयु पूरी करूंगा। मुझे न तो अब यह जिम्मेदारी चाहिए और न ही दी जाएगी। वास्तव में मैं इस पद की दौड़ में कहीं नहीं हूं ?
वीरभद्र पर नरम क्यों हैं शांता, इसका भी दिया जवाब
सवाल : कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि वीरभद्र और आप फ्रेंडली मैच खेलते हैं। इस घनिष्ठता का राज क्या है?
जवाब : यह आरोप मेरे मन को अक्सर पीड़ा पहुंचाता है। मैं राजनीति की उस पीढ़ी से हूं जब सद्भाव की राजनीति थी। मेरी वीरभद्र सिंह से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। बल्कि कांग्रेस से मेरी लड़ाई सिर्फ सिद्धांतों की है। मैं व्यक्तिगत आक्षेप लगाने का पक्षधर नहीं हूं। टकराव की राजनीति के भी खिलाफ हूं, वह चाहे दिल्ली में हो या हिमाचल में।
सवाल : कारगिल शहीद सौरभ कालिया से बर्बरता मामले को केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाए, इसके लिए बतौर सांसद क्या करेंगे?
जवाब : मैं पहले भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह मामला उठा चुका हूं। अब पूर्व सैनिक एकजुट हुए हैं। मामले को प्रधानमंत्री के समक्ष फिर से उठाया जाएगा।
सवाल : क्या आप राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं?
जवाब : मैं कभी किसी रेस में नहीं रहा हूं। मेरा विश्वास है कि मुझे जो मिलना है उसे दुनिया की कोई ताकत छीन नहीं सकती। और जो मुझे नहीं मिलना है उसे दुनिया की कोई शक्ति दे नहीं सकती है। मेरा यह भी मानना है कि देश का अगला राष्ट्रपति सर्वसहमति से चुना जाएगा। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की नौबत नहीं आनी चाहिए।