सांसद शांता कुमार ने प्रेस वार्ता में कहा कि धर्मशाला को दूसरी राजधानी घोषित करने का पूरा प्रारूप हमारे सामने लाया ही नहीं गया। न ही सरकार को दूसरी राजधानी का मतलब पता है। कांगड़ा जिला पहले पंजाब का हिस्सा था। 1966 में पंजाब रि-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट बना।
इसके बाद हिमाचल अस्तित्व में आया। इस एक्ट के साथ शिमला को हिमाचल की राजधानी बनाया गया। अब दूसरी राजधानी बनाने की बात क्या सरकार खुद कर सकती है, क्योंकि उस एक्ट के मुताबिक तो हिमाचल में एक ही राजधानी है। दूसरी राजधानी बनाने के लिए क्या इस एक्ट को संशोधित करने की जरूरत पड़ेगी।
अगर इस एक्ट को संशोधित करना पड़ेगा तो इसको संशोधित कौन करेगा? क्या हिमाचल सरकार ने इस संदर्भ में भारत सरकार से बात कर ली है या नहीं की। इस बारे में अभी तक कोई भी बात सामने नहीं आई है।
चौथा प्रश्न यह भी है कि धर्मशाला में शिमला की तरह क्या हर विभाग का सचिवालय पूरा साल रहेगा। सरकार धर्मशाला में 6 महीने रहेगी या कितना समय रहेगी। दूसरी राजधानी का निर्णय अधूरा, हवा में है। चुनाव के कारण इस प्रकार की घोषणाएं की जा रही हैं।