अढ़ाल गांव में आयोजित शांद महायज्ञ खूंदों की विदाई रस्म उछड़ पाछड़ के साथ संपन्न हो गया है। खूंदों की विदाई से पूर्व रास मंडल बनाकर देवलु पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर दिन भर नाचते रहे। अनुष्ठान के समापन के साथ ही सभी खूंद अपने-अपने क्षेत्र के लिए लौट गए हैं।
अढ़ाल में शांद महायज्ञ तीन दिनों तक चला। महायज्ञ के अंतिम दिन रविवार को सुबह जागा माता अढ़ाल के मंदिर प्रांगण में रास मंडल बनाया गया। शांद महायज्ञ में मौजूद सभी खूंद रास मंडल में प्रवेश कर तलवारे लहराते हुए नाचते रहे। खूं्दों का नृत्य दोपहर करीब दो बजे तक चलता रहा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हथियारों से लैस देवलुओं का पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य रहा। शांद महायज्ञ का आयोजन अढ़ाल, बटाड़ी व शरोग गांव के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से किया। आयोजक कमेटी के सभी सदस्यों ने रविवार दोपहर बाद मेजबान खूंदों को पारंपरिक रूप से विदा किया।
जागा माता अढ़ाल को समर्पित शांद महायज्ञ के सफल आयोजन से स्थानीय लोग भी काफी उत्साहित रहे। स्थानीय देवता के मोतमीन भगत सिंह ठाकुर ने बताया कि तीन दिनों तक चला अनुष्ठान सफल रहा। जागा माता अढ़ाल के आशीर्वाद व क्षेत्रवासियों के सहयोग से अनुष्ठान सफल रहा।
शांद महायज्ञ का आयोजन क्षेत्र की सुख शांति के लिए किया जाता है। अनुष्ठान के सफल आयोजन के लिए उन्होंने प्रबंधक कमेटी व क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस विभाग व अन्य सरकारी विभागों का भी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।