1926 में 60 मेगावाट शानन विद्युत परियोजना के लिए इंग्लैंड के कर्नल बैटी की ओर से बनाई रेललाइन को सुचारु रखने के लिए विभाग कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। उस समय ट्रैक से परियोजना के लिए भारी-भरकम सामान लाया जाता था।
वर्ष 1985 में इस परियोजना का नवीनीकरण कर इसे 110 मेगावाट का बना दिया गया, लेकिन रेललाइन ज्यों की त्यों ही रह गई। फिरोजपुर डिवीजन उत्तर भारत के तहत आने वाली लाइन की सुध लेना वाला आज कोई नहीं दिखता।
रेल मंत्री से उठाएंगे मामला
मंडी के सांसद रामस्वरूप ने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। शीघ्र इस ट्रैक को सुधारने के लिए रेलवे विभाग को पत्र भेजा जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया, इस बारे में भी पूछताछ होगी।
रेल मंत्री से बातचीत की जाएगी। उधर, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से इस मसले में बात करना चाही, लेकिन किसी ने टिप्पणी से इनकार कर दिया।