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कभी लाहौर को रोशन करने वाले शानन प्रोजेक्ट का अस्तित्व संकट में

Sat, 24 Feb 2018 01:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जोगिंद्रनगर (मंडी)
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आजादी से पहले लाहौर को रोशन करने वाले शानन बिजली प्रोजेक्ट का रेल ट्रैक पिछले डेढ़ साल से बंद है। ऐतिहासिक पठानकोट-जोगिंद्रनगर-शानन रेलमार्ग पर साल 2016 में बरसात के दौरान पहाड़ी दरकने से मलबा गिर गया है।

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इसे अभी तक नहीं हटाया गया है। इस रेल मार्ग का करीब 200 मीटर हिस्सा मलबा गिरने से गायब हो गया है, लेकिन करोड़ों का रेल बजट देने वाली सरकार को इसकी खबर तक नहीं है।

डेढ़ वर्ष पहले तक विद्युत परियोजना के लिए भारी मशीनरी लाने के लिए ट्रैक का प्रयोग होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। इस लाइन को विकसित करना तो दूर इसका उचित बंदोबस्त भी नहीं किया जा रहा है। शानन बिजली प्रोजेक्ट से अब हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को बिजली की सप्लाई होती है। 
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अब नहीं आता रेल का इंजन 
हर वर्ष मार्च में जोगिंद्रनगर से शानन तक ट्रायल पर रेल का इंजन आता था। यह लाइन चट्टान गिरने के कारण पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बद है। शानन गांव की बुजुर्ग महिला आशा ने बताया कि वे हमेशा इसी रास्ते से शहर जाती हैं।

एक बार तो वह इस चट्टान वाले स्थान पर गिर गईं और रेल की पटरी से टकराने से चोटें भी आई थीं। कुछ दिन पहले रेलवे विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लाइन के आसपास बने मकान मालिकों को अवैध मकान का नोटिस थमा गए थे।

उन्हें भी इस संदर्भ में बताया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नितिन, अमर सिंह, कार्तिक, अंकुश, विनय, अश्वनी, महेश का कहना है कि शानन आने और जोगिंद्रनगर पैदल जाने के लिए यह रास्ता शॉर्ट कट है। रास्ते में गिरी चट्टान के कारण इसे पार करना खतरनाक है। कई बार तो यहां राहगीरों को चोटें भी लगी हैं।

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रेल लाइन की सुध लेने वाला कोई नहीं

1926 में 60 मेगावाट शानन विद्युत परियोजना के लिए इंग्लैंड के कर्नल बैटी की ओर से बनाई रेललाइन को सुचारु रखने के लिए विभाग कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। उस समय ट्रैक से परियोजना के लिए भारी-भरकम सामान लाया जाता था।

वर्ष 1985 में इस परियोजना का नवीनीकरण कर इसे 110 मेगावाट का बना दिया गया, लेकिन रेललाइन ज्यों की त्यों ही रह गई। फिरोजपुर डिवीजन उत्तर भारत के तहत आने वाली लाइन की सुध लेना वाला आज कोई नहीं दिखता।

रेल मंत्री से उठाएंगे मामला
मंडी के सांसद रामस्वरूप ने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। शीघ्र इस ट्रैक को सुधारने के लिए रेलवे विभाग को पत्र भेजा जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया, इस बारे में भी पूछताछ होगी।

रेल मंत्री से बातचीत की जाएगी। उधर, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से इस मसले में बात करना चाही, लेकिन किसी ने टिप्पणी से इनकार कर दिया।
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