एसएफआई ने किया ईसी सदस्य हरीश जनारथा का घेराव।
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद(ईसी) की बैठक में भाग लेने आए शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा का एसएफआई कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। कार्यकर्ताओं ने हरीश जनारथा गो बैक, मुर्दाबाद... के नारे लगाए । इस पर विधायक को निकालने के लिए कार्यकर्ताओं और मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस जवानों और क्यूआरटी ने बल प्रयोग भी किया। इससे एसएफआई के कार्यकर्ता चोटिल भी हुए। इनमें एक छात्र को आंख के पास चोट आई। जवानों और कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस धक्का-मुक्की में छात्राओं को भी घसीट कर किनारे किया गया। बल प्रयोग के समय महिला पुलिस कर्मियों की संख्या नाम मात्र नजर आई। धक्का-मुक्की के बीच से विधायक को कुलपति कार्यालय तक निकालने को कड़ी मशक्क्त करनी पड़ी। एसएफआई ने पुलिस पर छात्र-छात्राओं पर लाठियां बरसाने और घसीटने के आरोप लगाए।
एसएफआई ने कहा कि पुलिस के साथ हुई झड़प और लाठियां बरसाने में उनके तीन कार्यकर्ताओं को चोटें आईं। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने विधायक के पुलिस की सुरक्षा में चले जाने के बाद पुस्तकालय के बाहर मुख्य सड़क पर बैठ कर प्रदर्शन किया। इसमें प्रदेश सरकार, विधायक, विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने पुलिस के कड़े पहरे के बीच धरना दिया। इससे वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए बंद रही। कार्यकर्ताओं ने एससीए चुनाव बहाल करने और मनोनयन से डम्मी एससीए गठन की प्रक्रिया का विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान एसएफआई के राज्य सह सचिव आशीष ने कहा कि 2013 के बाद से एससीए चुनाव पर लगे प्रतिबंध से विद्यार्थियों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। छात्र राजनीति का स्वरूप बदला है। सरकारों ने जानबूझकर छात्रों के जनवादी अधिकार छात्र संघ चुनावों पर प्रतिबंध लगाया है।
वहीं प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने शनिवार को ईसी की बैठक का विरोध किया और इसमें शामिल होने आए सदस्यों को मांगपत्र सौंपे। शिक्षक संघ के सदस्यों ने काले झंडे दिखाकर अपना विरोध व्यक्त किया। सदस्यों को सौंपे मांगपत्र में प्रदेश सरकार के 2022 से लेकर कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने, की मांग उठाई। संघ के पदाधिकारियों में अध्यक्ष प्रो. नीतिन व्यास ने ईसी सदस्य व विधायक हरीश जनारथ के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपा। नितिन व्यास ने बताया कि भविष्य में अगर मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।