शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से छात्र संगठन के नौ कार्यकर्ताओं के निष्कासन के फैसले का एसएफआई ने विरोध किया है। संगठन ने इसे कैंपस में चल रहे लोकतांत्रिक माहौल को समाप्त करने और तानाशाहीपूर्ण फैसले लागू करने की साजिश करार दिया है।
एसएफआई इकाई अध्यक्ष विक्रम ठाकुर और सचिव जीवन ठाकुर ने कुलपति पर आरोप लगाते हुए विवि में परीक्षा परिणाम की गड़बड़ियां और अन्य अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों का निष्कासन के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि लगातार कुलपति तरह-तरह के नियम बनाकर छात्रों को प्रताड़ित करने का कार्य कर रहे हैं। निष्कासन चाहे किसी भी छात्र का हो। वह किसी भी छात्र संगठन से ताल्लुक रखता हो, लेकिन छात्र विरोधी फैसले लागू कर कैंपस में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास होगा। इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। छात्र नेताओं का आरोप है कि विवि प्रशासन अपनी तय की गई 19 जुलाई की समय सीमा के भीतर यूजी के परिवार सेटल करवाने में नाकाम रहा है।
विभागों में कुलपति ने पीजी कोर्स की प्रवेश सूचि लगाने का फ रमान जरूर जारी किया है, लेकिन अभी भी कई विभागों में मेरिट में रहे छात्रों के नतीजे घोषित नहीं हुए हैं। बाहरी राज्यों में काउंसलिंग में अपीयर होने वाले विद्यार्थी अभी भी रिजल्ट सेटल करवाने को विवि में भटकने को मजबूर हैं। विक्रम ने कहा कि इन्हीं कुलपति के कार्यकाल में पीएचडी एमसीए जैसे विभागों में अवैध रूप से प्रवेश के मामले सामने आए, जिसकी कोई जांच तक नहीं हुई। छात्रावासों में इंटर हास्टल आउटिंग बंद की गई, दस बजे के बाद एंट्री बंद किए जाने जैसे फैसले लेकर छात्रों को बंदी की तरह रहने पर मजबूर किया जा रहा है। अभिभावकों को झूठे पत्र भेज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। विक्रम ने कहा कि लोकतंत्र की बहाली के एसएफआई हमेशा संघर्ष करती रही है। छात्र संघ चुनाव बहाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली को लेकर एसएफआई आंदोलन करेगी। उन्होंने सभी छात्र संगठनों से मिलकर कैंपस में लोकतंत्र को जिंदा रखने और तानाशाही के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन करने की अपील की है।