शिमला। एसएफआई ने विश्वविद्यालय में फीस और शुल्क वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन ने कहा कि प्रशासनिक और वित्तीय खामियों का बोझ छात्रों पर नहीं डाला जाना चाहिए। एसएफआई के प्रदेश सचिव अनिल ने वर्ष 2020 से 2023 के बीच हुई 186 नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने चयनित शिक्षकों की योग्यता और प्रमाणपत्रों के सत्यापन की मांग उठाई। संगठन ने सभी कैस पदोन्नतियों की समीक्षा करने की मांग की। एसएफआई ने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी प्रमाणपत्रों की जांच के साथ यूजीसी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। यूआईटी के शुल्क और खर्च का ऑडिट कराने तथा निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रिया की जांच करवाने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिक्त शिक्षक पदों को जल्द भरने की मांग की। संवाद