हिमाचल प्रदेश में सातवीं आर्थिक जनगणना की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस कार्य को पूरा करने के दौरान सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से आर्थिक जनगणना नहीं करवाई जाएगी। केंद्र सरकार ने लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से काम पूरा करने का फैसला लिया है। इससे एक पंचायत में तीन से पांच युवाओं को आर्थिक जनगणना का काम मिलेगा।
पहली बार आर्थिक जनगणना का पूरा डाटा ऑनलाइन केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इस कार्य को लगभग एक साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। आर्थिक जनगणना के तहत व्यावसायिक उद्यमों को पंजीकृत करने का प्रस्ताव है, जिन्हें आने वाले दिनों में लगातार अपडेट किया जाएगा।
हर लोकमित्र केंद्र पर तैनात किए जाएंगे गणनाकार
हर लोकमित्र केंद्र पर पांच गणनाकारों की तैनाती की जाएगी जिन्हें सीएससी-एसपीवी की ओर से आर्थिक सर्वे के लिए प्रशिक्षित और पंजीकृत किया जाएगा। पंजीकरण के बाद इनका इस्तेमाल सभी तरह के आंकड़े जुटाने में किया जा सकेगा। सूबे में लगभग 33 सौ लोकमित्र केंद्र हैं। लिहाजा, इस सर्वे के लिए 16000 हजार से अधिक गणनाकारों की जरूरत होगी। सर्वे में शामिल गणनाकारों को मेहनताने के रूप में प्रति परिवार 15-20 रुपये दिए जाएंगे।
प्रदेश में पहली बार पेपर लेस सर्वे
यह पहली बार है जब पूरी तरह पेपर लेस आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे सर्वे का काम महज छह माह में पूरा किया जा सकेगा, जिसमें अभी तक दो वर्ष का समय लगता है। डाटा जुटाना आसान होने से भविष्य में यह सर्वे हर दो वर्षों पर किया जा सकेगा जो अभी 10 साल में किया जाता है।
सांख्यिकी मंत्रालय के धर्मशाला स्थित कार्यालय के प्रभारी यशपाल ने कहा कि इस बार आर्थिक जनगणना लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से करवाई जाएगी। जिसके लिए प्रशिक्षण कार्य शुरू हो गए हैं। पूरा डाटा पेपर लेस एकत्रित किया जाएगा, जिसकी डिटेल मंत्रालय को ऑनलाइन ही भेजी जाएगी।