दूर-दूर से लोग माता बूढ़ी नागिन के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। सरयोलसर झील माता की एक किमी की परिधि तक फैली है। धूल खिलने पर झील शीशे की तरह चमक रही है। ट्रेवल एजेंसी हिमालयन के संचालक मोहन ठाकुर ने कहा कि वह वंदना ठाकुर, दिल्ली से आए जितेंद्र और ललिता के साथ सरयोलसर घूमने गए थे।
झील पूरी तरह से जमी हुई है। माता के भक्त भी सरयोलसर पहुंचना शुरू हो गए हैं। माता के कारदार भागे राणा ने कहा कि इस साल जलोड़ी दर्रा और सरयोलसर घूमने आने वाले सैलानियों को करीब तीन दशक बाद मई माह तक बर्फ देखने को मिलेगी।
बैसाख संक्रांति से शुरू होगी माता की पूजा
सरयोलसर झील में सुबह और शाम के तापमान में गिरावट होने से बैसाख संक्रांति से माता बूढ़ी नागिन की नियमित पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद पुजारी नियमित रूप से रहेंगे। कारदार भागे राम राणा ने कहा कि देव परंपरा के तहत 14 अप्रैल को बैसाख संक्रांति से माता की पूजा शुरू होगी।