दूसरी जलेब में सबसे आगे हिमाचली संस्कृति की अदभुत छटा बिखेरते कलाकार नृत्य करते हुए शामिल हुए। इसके बाद नशे से दूर रहने का संदेश देने वाला ब्रह्माकुमारीज विश्व विद्यालय का दल, घुड़सवार, होमगार्ड व पुलिस जवान की टुकड़ी चली। सराज घाटी के देवता छांजणू-छमांहू परंपरा का निर्वहन करते हुए आगे चले। उनके पीछे ऋषि मार्कंडेय, देव विष्णु मतलोडा, ऋषि पराशर, देवी अंबिका थट्टा डाहर, शैटी नाग, मगरु महादेव, देव बायला नारायण, चपलांदू नाग, बिठु नारायण, लक्ष्मी नारायण, देव हुरंग नारायण, देव पशाकोट, देव चुंजवाला, देव तुंगासी, देव गणपति, देव टुंडीवीर समेत अन्य देवी-देवता अपने अपने देवलुओं के साथ मध्य जलेब में शामिल हुए। प्रशासनिक अधिकारी, देवता समिति के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने रंग-बिरंगी पगड़ियां पहन जलेब में शिरकत की। मुख्य अतिथि के साथ खुली जीप में धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, एपीएमसी चेयरमैन संजीव गुलेरिया, जल बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा मौजूद रहे।