प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्क्रब टायफस के प्रकोप से पीड़ित करीब नौ मरीज अस्पताल में दाखिल हैं। पांच मरीज मेल मेडिसन और चार महिला वार्ड में दाखिल हैं।
स्थिति यह है कि अस्पताल में दाखिल स्क्रब टायफस मरीजों को बेड भी शेयर करना पड़ रहा है। यानी की एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए हैं। मेडिसन वार्ड में हालत ज्यादा खराब है। अस्पताल में इन दिनों एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया गया है।
मरीज विरोध भी कर रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। आर्थो वार्ड में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। बता दें कि आईजीएमसी में रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक की ओपीडी होती है। 857 बिस्तर वाले अस्पताल में रोजाना 70 से 80 मरीजों को दाखिल किया जा रहा है।
जब मरीज वार्डों में पहुंचते है तो मरीजों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को इस तरह की शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन अभी तक हल नहीं निकाला जा सका है। दूसरी ओर एक ओर परेशानी यह भी है कि डॉक्टर मरीजों को चार बजे के बाद डिस्चार्ज कर रहे हैं। डॉक्टरों की यह लापरवाही भी भारी पड़ रही है।
बढ़ रही मरीजों की संख्या : राहुल राव
अस्पताल के चिकित्सा उप अधीक्षक डॉ. राहुल रॉव ने कहा कि डिस्चार्ज मरीज के बेड न छोड़ने के कारण यह दिक्कत आ रही है। दूसरी ओर मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। समस्या के समाधान को प्रयास किए जा रहे हैं।
इन विभागों की हालत है सबसे खराब
मेडिसन और आर्थो वार्ड की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अस्पताल में सबसे ज्यादा डबलिंग इन्हीं दो विभागों में होती है। आए दिनों वार्ड में इस तरह की समस्या आम दिखती है। लेकिन न तो यूनिट हेड और न ही विभागाध्यक्ष इस समस्या का समाधान कर पाए हैं। हालांकि दूसरी ओर देखा जाए तो सर्जरी विभाग इन सभी विभागों से अलग है। मरीजों के दाखिले के अलावा यहां पर डिस्चार्ज करने की पूरी प्रक्रिया सिस्टमेटिक तरीके से पूरी की जाती है।