प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले साढ़े आठ लाख विद्यार्थियों को साल 2018 में कलरफुल वर्दी में नाकाम रहे शिक्षा विभाग ने अब फरवरी 2019 में वर्दी देने की तैयारी शुरू की है। वर्दी खरीद के लिए शॉर्ट टर्म टेंडर करने का फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने बीते दिनों पुरानी टेंडर प्रक्रिया को रद्द करते हुए नए सिरे से वर्दी खरीदने को मंजूरी दी है। शुक्रवार को शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई इंपावर्ड कमेटी की बैठक में इस मामले की तकनीकी दिक्कतों पर चर्चा की गई।
शिक्षा विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम के अफसरों की लेटलतीफी से साल 2018 में विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तर्ज पर कलरफुल वर्दी नहीं मिली है। मामले में मुख्यमंत्री की दखलंदाजी के बाद भी अफसरशाही हरकत में नहीं आई। ऐसे में सरकार को पुरानी टेंडर प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी। अब नए सिरे से वर्दी खरीद करने का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को हुई बैठक में शॉर्ट टर्म टेंडर करने का फैसला हुआ। वर्दी की खरीद एक साथ तीन साल के लिए की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जनवरी के पहले हफ्ते में टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। फरवरी अंत तक वर्दी मुहैया करवाने के लिए चयनित होने वाली कंपनी को लक्ष्य दिया जाएगा। शीतकालीन स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र फरवरी अंत में शुरू होगा। ऐसे में नया सत्र शुरू होते ही वर्दी देने के प्रयास शुरू किए गए हैं। ग्रीष्मकालीन स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर अप्रैल में वर्दी दी जाएगी। विद्यार्थियों को निशुल्क दी जाने वाली स्मार्ट वर्दी योजना का नाम भी सरकार ने बदल दिया है। कांग्रेस सरकार के समय में महात्मा गांधी वर्दी योजना और मुख्यमंत्री वर्दी योजना नाम से वर्दी दी जाती थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद योजना का नाम बदलकर अटल स्कूल वर्दी योजना रख दिया गया है।
पानी की स्टील बोतलों के लिए आमंत्रित किए टेंडर
सरकारी स्कूलों की नवीं कक्षा में पढ़ने वाले करीब 90 हजार विद्यार्थियों को पीने के पानी के लिए स्टील बोतलों की खरीद की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है। अक्तूबर में बोतलों के सैंपल फेल होने पर सरकार ने टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी थी। अब नए सिरे से खाद्य आपूर्ति निगम ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 750 मिलीलीटर क्षमता की बोतलें दी जानी हैं। पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पीने के पानी के लिए स्टेनलेस स्टील की बोतलें देने की घोषणा की थी। प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध लगाते हुए सरकार ने यह फैसला लिया।