जिला मुख्यालय के लमलैहड़ी गांव में निजी स्कूल बस हादसे में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से पहले चालक ने बस को रोककर जांचा था, उसका तेल लीक हो रहा था। बावजूद इसके बस मोड़ने ले गया। यह खुलासा प्रत्यक्षदर्शी मलकीयत और शिव कुमार ने किया। प्रत्यक्षदर्शी मलकीयत के अनुसार तेल लीक हो रहा था, बस में बच्चे बैठे थे, फिर भी चालक ने सूझबूझ का परिचय नहीं दिया। कुछ पलटे खाने के बाद बस खाई में पेड़-पौधों के बीच जा फंसी। खाई में फंसी बस में चीख पुकार मच गई। मलकीयत के अनुसार वह और उसका दोस्त खाई में उतरा और बच्चों को निकालने का प्रयास किया। अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर उन्होंने बच्चों को सड़क तक पहुंचाया। खून से लथपथ बच्चे हादसे के बाद सहम गए थे। यहां ग्रामीणों ने उन्हें पानी पिलाया और उनसे जानकारी ली। एक बच्चा सीट के नीचे फंसा हुआ था। सब बच्चों को निकालने के बाद ढूंढने पर वह मिला। कड़ी मशक्कत कर उसे निकाला गया।
मलकीयत की मानें तो बस में खराबी होने की जानकारी के बावजूद बस चलाना सीधे तौर पर लापरवाही है। प्रत्यक्षदर्शी शिव कुमार ने बताया कि बस स्टार्ट नहीं थी और न्यूटल ही चलाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। इसी लापरवाही का नतीजा रहा कि बस हादसाग्रस्त हो गई। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस को सूचना दे दी गई, लेकिन मौके पर 30 मिनट तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस पर गंभीर घायल को निजी कार से अस्पताल भेजा गया। बाद में निजी स्कूल की एक अन्य बस के जरिये ही बच्चों को घटनास्थल से ले जाया गया।