हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच की। इस जांच में प्रदेश के कई इलाकों में फर्जी एडमिशन से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटालें होने की बात सामने आई। घोटाले की राशि 250 करोड़ बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीबीआई से जांच करने की सिफारिश की है।
25 से ज्यादा शिक्षण संस्थान शक के घेरे में
शिमला। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में घोटाला होने के मामले की प्रारंभिक जांच में सूबे के 25 से अधिक निजी शिक्षण संस्थान शक के घेरे में आ गए हैं। इसके अलावा छात्रवृत्ति पोर्टल बनवाने वाले अफसर भी संदेह के घेरे में है। उच्च शिक्षा निदेशालय में गठित जांच कमेटी के सदस्यों के मुताबिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपीई पास पोर्टल में कई तरह की खामियां मिली है। इन खामियों का लाभ उठाते हुए ही निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी ऐडमिशन दिखाकर विद्यार्थियों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले और सरकारी धनराशि हड़पी हैं।
चार फोन नंबरों से जुड़े खातों में डाल दी बीस हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति
शिमला। जांच रिपोर्ट के अनुसार बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है। छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रखा। साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी किसी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं की।