छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई की जांच की जद में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के चार इंस्टीट्यूट भी आए हैं। इन्हें साल 2013-14 से साल 2016-17 के बीच करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति मिली है। यह राशि इस मियाद के दौरान दो हजार विद्यार्थियों में बांटी गई। खास बात यह है कि कुछ इंस्टीट्यूट में किसी साल एक से दस बच्चे ही रहे, इसके बावजूद छात्रवृत्ति लाखों में दी गई, जबकि इसी दौरान कुछ अन्य शैक्षणिक संस्थानों में हजारों रुपये की राशि दी गई।
सीबीआई यह तस्दीक करना चाह रही है कि उक्त राशि इन सेंटरों के विद्यार्थियों तक पहुंची थी या फिर यहां भी खेल हो गया। दरअसल, मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने सबसे पहले उन संस्थानों को अपने रडार पर लेना शुरू किया, जिनको करोड़ों की छात्रवृत्ति वितरित हुई। इनमें हिमाचल के अलावा पंजाब और चंडीगढ़ के कई बड़े संस्थान जांच टीम के रडार पर आ गए। प्रदेश के कई सरकारी संस्थान ऐसे भी थे, जिन्हें करोड़ों की छात्रवृत्ति तो मिली, लेकिन जांच टीम ने इन्हें पहले चरण में बख्श दिया।
अब पहले चरण की जांच पूरी होने पर इन सरकारी संस्थानों के केंद्राें में वितरित हुई छात्रवृत्ति की भी स्कैनिंग की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ संस्थान तो ऐसे हैं, जहां रिकार्ड में छात्र ही नहीं थे, लेकिन उन्हें लाखों के हिसाब से छात्रवृत्ति का भुगतान हो गया। जाहिर है इसमें दस्तावेजों में गड़बड़ी हो सकती है। ऐसे में इस वितरण प्रक्रिया को भी जांचा जा रहा है।