सरोज ने बताया रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय शिमला से भी फोन आया था। फोन पर अधिकारी ने सऊदी अरब में फंसे लोगों की हरसंभव मदद के बारे में आश्वस्त किया है। प्रदेश सरकार से भी जेल में बंद बीमारों के उपचार के लिए के लिए कहा गया। चार माह पहले हरजिंद्र सहित 14 लोगों को एजेंटों ने 90-90 हजार रुपये लेकर टूरिस्ट वीजा पर इस आश्वासन के साथ सऊदी अरब भेजा था कि तीन माह खत्म होने पर उन्हें वर्क परमिट मिल जाएगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता रहा। वीजा समाप्त होने पर मालिक के चुंगल से किसी तरह छूट कर सभी 14 लोगों ने पुलिस में आत्मसमर्पण किया। इनमें से दो युवकों को मालिक छुड़ाकर ले गया था, जबकि अन्य रियाद जेल में बंद हैं। जहां से एक को पुलिस ने इंडिया डिपोर्ट कर दिया है।