जमा दो के कला संकाय में मेरिट में आने वाले जीएसएसएस सदू बरग्रां के संजय कुमार को हीरा बनाने के लिए उसके माता पिता ने खुद को ताउम्र अभावों की आग में झुलसाए रखा।
कड़ी मेहतन के बूते संजय ने मेरिट में पांचवा स्थान जरूर हासिल किया लेकिन पढ़ाई का बेहतरीन माहौल बनाने में माता पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। संजय के पिता सुरजीत सिंह पेशे से मजदूर और किसान हैं।
बकौल, सुरजीत सिंह उन्होंने अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के रास्ते में गरीबी को कभी भी आड़े नहीं आने दिया। सुरजीत सिंह ने बताया कि परिवार का खर्चा मजदूरी करके और घास, अनाज, दूध बेचकर चलता है। वह अपने दूसरे बेटे को भी इंजीनियर बना रहे हैं।
ऐसे में पैसों की काफी ज्यादा जरूरत रहती है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए उन्होंने सासाइटी और बैंक से भी लोन ले रखा है। कई बार रिश्तेदारों से भी उधार लेना पड़ता है। शिमला में प्रतिभा सम्मान समारोह में जाने को भी खर्चे के लिए पैसा रिश्तेदारों से लिया है।
टाइम टेबल फिक्स कर बनाया पढ़ाई का माहौल
घर में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने के लिए उन्होंने बच्चों के लिए टाइम टेबल फिक्स किया था। वह बच्चों को पढ़ाने के लिए सुबह करीब 3:30 बजे उठा देते थे। उसके बाद वह खेतों में चले जाते थे।
शाम को बच्चे खेतीबाड़ी में सहयोग करते थे और रात को फिर देर रात तक पढ़ाई। मां सुनीता ने बताया कि उनका बेटा संजय रोज काहनफट (सुलह) से सदू बरग्रां स्कूल (नगरोटा बगवां) में पढ़ाई के लिए 16 किलोममीटर पैदल चलता था।