अजय को दो अगस्त 2017 को करेंट लगने के बाद सरकार, प्रशासन और बिजली बोर्ड ने मात्र 15 हजार रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया। उसके उपचार में अब तक पांच लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। दो मेजर ऑपरेशन होना अभी भी बाकी हैं।
अजय के अनुसार उसके इलाज का पूरा खर्च उनके भाई कर रहे हैं, जो चंबा में चाय की रेहड़ी लगाते हैं। सरकार, प्रशासन और बिजली बोर्ड की ओर से उसे उचित सहायता नहीं मिली।