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विधानसभा शीत सत्र: नशे को लेकर गर्माया सदन, सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक

Fri, 14 Dec 2018 07:53 PM IST
ashok chauhan ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तपोवन (धर्मशाला)
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शीत सत्र के पांचवें दिन संशोधित एनडीपीएस एक्ट पर चर्चा से पहले नशे को लेकर सदन गर्मा गया। सरकार और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक हुई। विपक्ष का कहना था कि जब सरकार को यह नहीं पता कि सूबे में कितने युवा नशे की चपेट में हैं तो वह तैयारी कैसे कर रही है।

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सरकार 28 प्रतिशत युवाओं के नशे में शामिल होने का दावा कर रही है? इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि तीन साल में तीन युवाओं की मौत नशे से हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को कई अपुष्ट स्रोतों से भी जानकारी मिलती है।

विधायक अनिरुद्ध सिंह और सुभाष ठाकुर ने सवाल किया कि प्रदेश में तीन साल में नशे की वजह से कितने युवाओं की मौत हुई। कितने ड्रग्स माफिया पकड़े गए? प्रदेश में कितने प्रतिशत युवा नशे का सेवन करते हैं, नशाखोरी रोकने को क्या कदम उठाए हैं? 

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2016 में 1085 व्यक्ति गिरफ्तार हुए

मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 2016 में 1085 व्यक्ति गिरफ्तार हुए। इनमें 1026 पुरुष, 53 महिलाएं और 6 विदेशी पुरुष शामिल थे। 2017 में पकड़े गए 1221 में 1156 पुरुष, 49 महिलाएं, 15 विदेशी पुरुष और एक विदेशी महिला हैं। 2018 में अब तक 1589 लोग गिरफ्तार हुए।

इनमें 1520 पुरुष, 59 महिलाएं, 8 विदेशी पुरुष और दो विदेशी महिलाएं हैं। कहा कि पुलिस से नशे के सौदागरों पर नकेल कसने को कहा है। एनडीपीएस एक्ट में संशोधन कर इसे और सख्त बनाने, पुनर्वास करने और नशा मुुक्ति केंद्र को लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

भांग और अफीम की खेती नष्ट करने, जानी-मानी हस्तियों के जरिये सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर लोगों को जागरूक करने को कदम उठाए हैं। थाना स्तर पर नशा निवारण समितियां बनाई हैं। 

नादौन के विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने पूछा कि जब सरकार यह नहीं जानती कि कितने युवा नशे की चपेट में हैं तो फिर मुख्यमंत्री किस आधार पर 28 प्रतिशत युवाओं के नशे की चपेट में होने का दावा करते हैं। सदन के अंदर और बाहर की जानकारी के अंतर से प्रदेश में भय का माहौल पैदा हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर आंकड़े ही जरूरी हैं तो फिर सिर्फ तीन मौत के लिए तो सरकार को न तो एक्ट में संशोधन करने की जरूरत है और न ही इस सदन के सदस्यों को चिंतन और चर्चा करनी चाहिए। भले ही किसी संस्था के जरिये ठोस आंकड़ा सामने न आया हो, लेकिन फीडबैक के आधार पर ही पक्ष और विपक्ष इस विषय को लेकर चिंतित हैं।

पुलिस कर्मियों को नहीं मिलेगा पुराना पे स्केल, न बढ़ाएगी राशन मनी 

 प्रदेश में पांच ईको टूरिज्म स्थलों को पीपीपी मोड से चलाया जा रहा है। 16 ईको टूरिज्म स्थल विभागीय स्तर पर चल रहे हैं। बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी के प्रश्न के लिखित जवाब में वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष 25 नए स्थानों का चयन किया गया है। इनके लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। 

 सरकार 2015-16 के बाद भर्ती पुलिस कर्मियों को आठ साल बाद ही नया पे-स्केल देगी, जबकि पुलिस कर्मियों की राशन मनी भी नहीं बढ़ाएगी। सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री जयराम

ठाकुर ने बताया कि एक जनवरी, 2012 के बाद भर्ती हुए कांस्टेबल को सरकार दो साल बाद नया पे स्केल दे रही थी, लेकिन 15 जनवरी, 2015 की अधिसूचना के बाद कांस्टेबल को आठ साल बाद नया पे स्केल देने का प्रावधान किया गया है। 

मिशन मोड पर होगा वन अधिकार अधिनियम के आवेदनों का निस्तारण 

 वन अधिकार अधिनियम के लंबित मामलों को प्रदेश सरकार अब मिशन मोड पर निपटाएगी। इसके लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कोशिश की जाएगी कि समयबद्ध इन आवेदनों का निस्तारण किया जाए।

शीत सत्र के दौरान माकपा विधायक राकेश सिंघा और कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल के नियम 62 के तहत उठाए गए मुद्दे के जवाब में जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने यह आश्वासन दिया। 

मारकंडा ने कहा कि 28 जुलाई 2008 को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस अधिनियम को प्रथम चरण में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लागू करने और 14 मार्च को अधिनियम को गैर-जनजातीय क्षेत्रों में भी लागू करने का निर्णय लिया गया। इन आवेदनों के निस्तारण के लिए तीन स्तरीय कमेटी का गठित किया गया है।

बताया कि 17 मई को प्रधान सचिव की तरफ से सभी डीसी को पत्र लिखा गया है। बताया कि वर्तमान में अधिनियम के तहत 30 सितंबर तक आए दावों में व्यक्तिगत श्रेणी के कुल 2146 आवेदन थे, जिनमें से 129 का निस्तारण हुआ है।

इसके अलावा सामुदायिक क्षेत्र के कुल आए 173 आवेदनों में 7 का निस्तारण हुआ है। कहा कि चूंकि जिला उपायुक्त आवेदनों के लिए निस्तरण के लिए अधिकृत किए गए हैं, ऐसे में उन्हें फिर सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वह जंगल की उस जमीन पर रह रहे लोगों के दावों के आवेदन लेकर उनका निस्तारण करें।

इससे पहले राकेश सिंघा ने मांग की कि एफआरए के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए ताकि उन जंगलों में रहने वालों को भले ही मालिकाना हक न मिले लेकिन वह बेघर भी न हो। 
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भांग की खेती को मान्यता देने से सरकार का इंकार

 सूबे में भांग की खेती का वाणिज्यीकरण नहीं किया जाएगा। पिछले दिनों भांग की खेती को मान्यता देने को लेकर सीएम जयराम ठाकुर ने खुद बयान दिया था कि इसके वाणिज्यीकरण बारे लोगों के सुझाव आए हैं। इस पर सरकार विचार कर रही है।

शुक्रवार को कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया कि सूबे में भांग की खेती को मान्यता नहीं दी जाएगी। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने कुछ समय पहले भांग की खेती को वाणिज्यीकरण कर मान्यता दी है।

इसके बाद हिमाचल में भी सरकार पर लोग इसे मान्यता देने का दबाव बना रहे थे। हिमाचल का मौसम भांग की खेती के लिहाज से अनुकूल है। साथ ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भांग प्राकृतिक रूप से पैदा होती है। विभिन्न धार्मिक उत्सवों में भी भांग का प्रयोग किया जाता है।

ऐसे में लोगों कई दलीलें देकर सरकार से भांग की खेती को मान्यता देने की मांग कर रहे थे। विधानसभा में भी कई विधायक भांग की खेती का वाणिज्यीकरण के पक्ष में अपने विचार दे चुके हैं, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया वह भांग की खेती को वाणिज्यीकरण की मंजूरी नहीं देगी।
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