पत्र योगेश चंद्रा को भेजकर इस संबंध में जानकारी देने को कहा गया, लेकिन सूचना उपलब्ध कराने के बजाय लिखित में बताया गया कि यह जानकारी कार्यालय में मौजूद नहीं है। इतनी लंबी प्रक्रिया के बावजूद सूचना न मिलने से निराश प्रार्थी ने इस संबंध में केंद्रीय सूचना आयुक्त दिल्ली के पास अपील कर दी।
केंद्रीय सूचना आयुक्त अमीतावा भट्टाचार्य ने अपील का कड़ा संज्ञान लिया और एनएचएआई के तकनीकी जीएम निशु गुप्ता को शपथ पत्र दायर करने को कहा। अब अधिकारी को बताना होगा कि उक्त सूचना को कब नष्ट किया गया। सूचना नष्ट करने के लिए क्या कोई अधिकारी के पास अधिकार हैं?
यह भी बताएं कि इतनी जल्दी इस रिकॉर्ड को नष्ट करने की क्या जरूरत पड़ी? इसके अलावा सूचना के अधिकार की धारा 6/3 के तहत सूचना पत्र को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में समस्या अनुसार स्थानांतरण न करने पर भी कड़ा संज्ञान लिया गया। संबंधित अधिकारियों को चेताया गया है कि ऐसी गलती फिर से करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।