483 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग में रोहतांग टनल बनने से 50 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इधर, सीमा सड़क संगठन के अतिरिक्त महानिदेशक मोहन लाल ने बताया कि मनाली-रोहतांग मार्ग को बीआरओ रोहतांग टनल बनने के पांच सालों तक अपने अधीन ही रखेगा।
टनल में किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर रोहतांग दर्रा होकर ही आवाजाही होगी। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (एमओडी) की प्राथमिकता एक टनल में शिंकुला टनल भी शामिल है। एमओडी में शिंकुला टनल का प्रस्ताव भेजा गया है।
यहां से जल्द स्वीकृति मिलने की संभावना है। स्वीकृति मिलने पर कंसलटेंसी कांट्रेक्ट के लिए टेंडर किए जाएंगे। कंसलटेंसी रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआर बनाई जाएगी। बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक मोहन लाल ने बताया कि शिंकुला टनल का निर्माण दो वर्ष तक शुरू होने की उम्मीद है। जल्द शिंकुला सड़क भी बनकर तैयार होगी।