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Himachal: बिना इंटरनेट भी बात सुनेगा रोबोट, खुद तय करेगा काम का क्रम, आईआईटी मंडी ने विकसित की तकनीक

Fri, 14 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संजीव शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इंस्ट्रक्ट 2 एक्ट नाम की ऐसी तकनीक विकसित की है, जो रोबोट को इंसान के दिए सामान्य भाषा के निर्देश समझकर उसके अनुसार कार्रवाई करने में सक्षम बनाती है।
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आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इंस्ट्रक्ट 2 एक्ट नाम की तकनीक विकसित की। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब रोबोट से कोई काम कराने के लिए अलग-अलग प्रोग्रामिंग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप उसे सामान्य भाषा में काम बता सकेंगे और वह खुद तय करेगा कि काम को किस क्रम में पूरा करना है। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इंस्ट्रक्ट 2 एक्ट नाम की ऐसी तकनीक विकसित की है, जो रोबोट को इंसान के दिए सामान्य भाषा के निर्देश समझकर उसके अनुसार कार्रवाई करने में सक्षम बनाती है। अभी प्रणाली केवल अंग्रेजी भाषा में दिए निर्देश समझती है। भविष्य में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को इसमें शामिल करने की योजना है। खास है कि इसके लिए हर बार इंटरनेट या बाहरी सर्वर पर निर्भर रहने की जरूरत भी नहीं होगी।

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प्रणाली खुद निर्देश को छोटे-छोटे चरणों में बांटेगी
अगर रोबोट को कहा जाए कि किसी वस्तु को उठाकर दूसरी जगह रख दो तो उसे यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि पहले वस्तु के पास जाओ, उसे पकड़ो, उठाओ, वहां तक ले जाओ और फिर रखो। प्रणाली खुद निर्देश को छोटे-छोटे चरणों में बांटेगी और उसी आधार पर रोबोट की गतिविधि तय करेगी। इस तकनीक से लैस रोबोट भविष्य में घरों में सामान व्यवस्थित करने, सतह पोंछने, बोतल से दूसरे पात्र में तरल डालने और जरूरी वस्तुएं एक से दूसरी जगह पहुंचाने जैसे काम कर सकते हैं। अस्पतालों में दवाएं और जरूरी सामान पहुंचाने, उद्योगों और भंडार गृहों में बार-बार किए जाने वाले कार्यों में भी इसका इस्तेमाल संभव है।

आईआईटी मंडी ने दाे साल तक किया शोध
इस प्रक्रिया में इंस्ट्रक्ट 2 एक्ट, रोबोट एक्शन नेटवर्क और डायनामिक अडैप्टिव ट्रैजेक्टरी रेडियल नेटवर्क को एक साथ इस्तेमाल किया गया है। कैमरे की मदद से रोबोट आसपास की वस्तुओं और वातावरण को समझ उसी के अनुसार कार्य करता है। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में करीब दो साल तक चले इस शोध के दौरान रोबोट को निर्देश समझाने के लिए 2,850 अंग्रेजी निर्देशों का समूह तैयार किया गया। इसमें रोबोट के 10 बुनियादी काम, 10 से अधिक तरह की वस्तुएं और पांच प्रमुख कार्य श्रेणियां शामिल थीं। मॉडल को 570 ऐसे निर्देश भी दिए गए, जिन्हें उसने प्रशिक्षण के दौरान नहीं देखा था। इनमें उसने 91.5 फीसदी सटीकता के साथ यह पहचान लिया कि रोबोट को कौन-कौन से छोटे काम करने हैं। इसकी तुलना एलएसटीएम, बाईएलएसटीएम समेत अन्य मॉडलों से भी की गई।

असली रोबोट पर 80 परीक्षण, 72 सफल
तकनीक को वास्तविक रोबोट पर भी परखा गया। इससे चार तरह के काम करवाए गए। इनमें वस्तु उठाकर रखना, वस्तु दूसरी जगह डालना, पोंछना और वस्तु उठाकर पहुंचाना शामिल था। प्रत्येक काम के 20 परीक्षण किए गए। कुल 80 परीक्षणों में 72 सफल रहे। इंटरनेट उपलब्ध न होने वाले क्षेत्रों में भी यह उपयोगी हो सकती है। अस्पतालों, उद्योगों और ऐसे स्थानों पर जहां लगातार नेटवर्क उपलब्ध रहना चुनौती है, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह शोध आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में करीब दो साल तक चला। टीम में अर्चित शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, जॉन रेबेरो, पीयूष ठाकुर, डॉ. नरेंद्र कुमार धर और प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा शामिल रहे। शोध फिलहाल एआरएक्सआईवी पर पूर्व प्रकाशित शोधपत्र के रूप में उपलब्ध है और अंतिम पांडुलिपि शोध पत्रिका में भेजने के लिए तैयार है। - डॉ. नरेंद्र कुमार धर, सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी मंडी
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अभी शुरुआती चरण में है तकनीक
शोधकर्ताओं के अनुसार तकनीक अभी शुरुआती शोध और परीक्षण के चरण में है। इसकी तकनीकी परिपक्वता का स्तर 3-4 आंका गया है। व्यापक व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले अभी कई चरणों में विकास और परीक्षण की जरूरत होगी। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए पांच से दस वर्ष का विकास और परीक्षण बाकी हो सकता है। अगले चरण में शोधकर्ताओं का लक्ष्य अधिक निर्देशों और लंबे आदेशों को समझने की क्षमता विकसित करना है। साथ ही वस्तुओं की पहचान और उन्हें पकड़ने की विश्वसनीयता बढ़ाने पर काम किया जाएगा। इसके बाद अस्पतालों, उद्योगों और घरों में बड़े स्तर पर परीक्षण की योजना है।
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