इसके अनुसार हर काम में लगाई गई मशीनरी से संबंधित वाहनों में ग्लोबल पॉजिशनिंग डिवाइस(जीपीएस) लगाया जाएगा। यह उपकरण खुद ठेकेदार नहीं लगाएंगे, बल्कि इसके लिए यह काम किसी तीसरी एजेंसी को दिया जाएगा। ठेकेदार इससे संबंधित डाटा में छेड़खानी न करे, इसलिए ऐसा किया जा रहा है। इससे गूगल मैप पर उस मशीनरी की लाइव पॉजिशनिंग का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए तीन स्तरों पर मशीनरी को लाइव देखा जा सकेगा। यानी, इसे राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (एनआरआईडीए), राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एसआरआरडीए) और जिला स्तर पर पीआईयू के स्तर पर देखा जा सकेगा।
पहली शेल्फ में केंद्र ने दिए 425 करोड़, 45 सड़कें बनेेंगी
पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण के लिए बनाई जा रही सड़कों की पहली शेल्फ में हिमाचल प्रदेश के लिए 425 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इससे 45 सड़कें बनेंगी। इनकी लंबाई 450 किलोमीटर की होगी। इस तीसरे चरण में कुल 3,125 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनेेंगी। इस फेज के तहत 2026 तक काम चलेगा।