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हिमाचल: विश्वामित्र ने वशिष्ठ मुनि के 100 पुत्रों का यहां किया था वध, जानिए यहां की रोचक गाथा

एसडी शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, मैहतपुर (ऊना) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 16 Sep 2022 10:56 PM IST

सार

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थल पर ब्रह्मा के पुत्र वशिष्ठ मुनि ने हजारों साल तक तपस्या की तथा तपस्या के बल पर ही 100 पुत्रों की उत्पत्ति की। वशिष्ठ मुनि को ब्रह्मऋषि भी कहा जाता था।
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ब्रह्माहुति को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है। - फोटो : संवाद

सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चिरकाल तक जिस पवित्र देवधरा पर बैठकर तपस्या की तथा स्वयं देवताओं के साथ यज्ञ अनुष्ठान करके आहुतियां डाली, उस पवित्र धार्मिक स्थान को ब्रह्माहुति के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इसे ब्रह्मावर्त क्षेत्र कहा गया है। इसके चार द्वार माने गए हैं। जिसके पश्चिमी द्वार पर ब्रह्मावती अर्थात ब्रह्माहुति स्थित है।

ऊना जिला के इस पवित्र एवं रमणीक स्थल का बहुत महत्व माना गया है। बैसाखी पर्व पर हिमाचल तथा पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आकर पवित्र सरोवर में स्नान करके पूजन वंदन करते हैं। मान्यता है कि भगवान श्री ब्रह्मा जी ने इस दिव्य स्थल पर बैठकर चिरकाल तक तपस्या की थी उस तपस्या के दौरान एक तेज पुंज प्रकट हुआ। यह तेज पुंज ज्वाला के रूप में परिवर्तित हुआ, बाद में यह ज्वाला नारी के रूप में प्रकट हुई। इंद्रदेव सहित अन्य देवताओं ने इस दिव्य रूप से आशीर्वाद प्राप्त किया था।



विश्वामित्र को किया ब्रह्म हत्या से दोषमुक्त
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थल पर ब्रह्मा के पुत्र वशिष्ठ मुनि ने हजारों साल तक तपस्या की तथा तपस्या के बल पर ही 100 पुत्रों की उत्पत्ति की। वशिष्ठ मुनि को ब्रह्मऋषि भी कहा जाता था। इस काण राजऋषि विश्वामित्र वशिष्ठ मुनि को ब्रह्मऋषि की उपाधि के कारण द्वेष भाव रखने लगे। मान्यता है कि इसी द्वेष भावना के कारण विश्वामित्र ने वशिष्ठ मुनि के सौ पुत्रों का इसी स्थल पर वध किया था। विश्वामित्र को बालकों की हत्या पर ब्रह्म हत्या का दोष लगा और ब्रह्मदंड भी मिला। दोष निवारण हेतु विश्वामित्र ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया।

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ब्रह्माहुति को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है। - फोटो : संवाद
सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चिरकाल तक जिस पवित्र देवधरा पर बैठकर तपस्या की तथा स्वयं देवताओं के साथ यज्ञ अनुष्ठान करके आहुतियां डाली, उस पवित्र धार्मिक स्थान को ब्रह्माहुति के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इसे ब्रह्मावर्त क्षेत्र कहा गया है। इसके चार द्वार माने गए हैं। जिसके पश्चिमी द्वार पर ब्रह्मावती अर्थात ब्रह्माहुति स्थित है।

ऊना जिला के इस पवित्र एवं रमणीक स्थल का बहुत महत्व माना गया है। बैसाखी पर्व पर हिमाचल तथा पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आकर पवित्र सरोवर में स्नान करके पूजन वंदन करते हैं। मान्यता है कि भगवान श्री ब्रह्मा जी ने इस दिव्य स्थल पर बैठकर चिरकाल तक तपस्या की थी उस तपस्या के दौरान एक तेज पुंज प्रकट हुआ। यह तेज पुंज ज्वाला के रूप में परिवर्तित हुआ, बाद में यह ज्वाला नारी के रूप में प्रकट हुई। इंद्रदेव सहित अन्य देवताओं ने इस दिव्य रूप से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

विश्वामित्र को किया ब्रह्म हत्या से दोषमुक्त
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थल पर ब्रह्मा के पुत्र वशिष्ठ मुनि ने हजारों साल तक तपस्या की तथा तपस्या के बल पर ही 100 पुत्रों की उत्पत्ति की। वशिष्ठ मुनि को ब्रह्मऋषि भी कहा जाता था। इस काण राजऋषि विश्वामित्र वशिष्ठ मुनि को ब्रह्मऋषि की उपाधि के कारण द्वेष भाव रखने लगे। मान्यता है कि इसी द्वेष भावना के कारण विश्वामित्र ने वशिष्ठ मुनि के सौ पुत्रों का इसी स्थल पर वध किया था। विश्वामित्र को बालकों की हत्या पर ब्रह्म हत्या का दोष लगा और ब्रह्मदंड भी मिला। दोष निवारण हेतु विश्वामित्र ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया।

तपस्या से प्रसन्न ब्रह्मजी प्रकट हुए। विश्वामित्र ने ब्रह्मा जी से ब्रह्महत्या से दोषमुक्त करने को कहा। ब्रह्माजी ने कहा कि यहां पर यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन करो। मैं स्वयं सभी देवताओं सहित यज्ञ में आहुतियां डालकर अपने पुत्रों का उद्धार करूंगा। ब्रह्माजी ने सभी देवताओं सहित यज्ञ में आहुतियां डाली।

इस कारण इस स्थल का नाम ब्रह्माहुति विख्यात हुआ। भगवान शिव भी लिंग के रूप में स्थल पर विराजमान हैं। ब्रह्माहुति को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर सती कुंड तथा ब्रह्म कुंड विद्यमान है। श्रद्धालु दूर-दूर से यहां स्नान करने आते हैं। 

वर्तमान में इस पवित्र स्थली पर महंत महेश गिरी पिछले कई वर्षों से पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। आज से कुछ वर्ष पूर्व मंदिर तक पहुंचने के लिए मार्ग तक नहीं था। राज्य सरकार ने इस पवित्र स्थली तक सड़क निर्माण करवाकर यहां पहुंचने का मार्ग सुगम बना दिया है।
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