सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चिरकाल तक जिस पवित्र देवधरा पर बैठकर तपस्या की तथा स्वयं देवताओं के साथ यज्ञ अनुष्ठान करके आहुतियां डाली, उस पवित्र धार्मिक स्थान को ब्रह्माहुति के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इसे ब्रह्मावर्त क्षेत्र कहा गया है। इसके चार द्वार माने गए हैं। जिसके पश्चिमी द्वार पर ब्रह्मावती अर्थात ब्रह्माहुति स्थित है।
ऊना जिला के इस पवित्र एवं रमणीक स्थल का बहुत महत्व माना गया है। बैसाखी पर्व पर हिमाचल तथा पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आकर पवित्र सरोवर में स्नान करके पूजन वंदन करते हैं। मान्यता है कि भगवान श्री ब्रह्मा जी ने इस दिव्य स्थल पर बैठकर चिरकाल तक तपस्या की थी उस तपस्या के दौरान एक तेज पुंज प्रकट हुआ। यह तेज पुंज ज्वाला के रूप में परिवर्तित हुआ, बाद में यह ज्वाला नारी के रूप में प्रकट हुई। इंद्रदेव सहित अन्य देवताओं ने इस दिव्य रूप से आशीर्वाद प्राप्त किया था।