समझौता ज्ञापन के तहत मौजूदा और नई उड़ान हवाई सेवाओं के साथ हवाई संपर्क और संबंधित सुविधाओं के विकास और संचालन के लिए सहयोग का व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। यह समझौता 10 वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार 20 प्रतिशत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) का योगदान करेगी, जबकि शेष 80 प्रतिशत वीजीएफ केंद्र सरकार वहन करेगी। इसके बाद विमानन कंपनियां निविदा प्रक्रिया में भाग लेंगी, जिसमें हवाई सेवाओं के लिए रूट भी निर्धारित होंगे।
संदीप कुमार ने बताया कि हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के संचालन की अधिक लागत को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री से वीजीएफ के लिए संशोधित 90:10 का अनुपात लागू करने का आग्रह किया है। इसके तहत केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत और राज्य सरकार से 10 प्रतिशत वित्तीय सहायता देने की मांग की गई है।