शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में पीएचडी शोध कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एंटी-प्लेजरिज्म नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। नियमों के तहत कि अब किसी भी शोधार्थी की थीसिज बिना सॉफ्टवेयर आधारित प्लेजरिज्म जांच के स्वीकार नहीं की जाएगी। यह कदम यूजीसी के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है जिसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध कार्य की मौलिकता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया है। एचपीयू में इसके लिए अधिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रत्येक थीसिज की जांच की जाएगी और निर्धारित सीमा से अधिक समानता पाए जाने पर उसे संशोधन के लिए वापस भेजा जा रहा है। शोधार्थियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी लेकिन कई बार सॉफ्टवेयर में सामान्य संदर्भों को भी प्लेजरिज्म में शामिल कर लिया जाता है जिससे प्रतिशत अधिक दिखता है। संवाद