मुख्य सचिव अनिल खाची ने फसल बीमा के खेल पर बीमा कंपनियों और बैंक प्रतिनिधियों को मंगलवार को तलब किया। बैंकों ने बीमा कंपनियों पर इसका ठीकरा फोड़ना चाहा कि वे तो निर्देशानुसार प्रीमियम काटते हैं, क्लेम देना बीमा कंपनियों का काम है। वहीं, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि अपनी गलती मानने के बजाय किसानों-बागवानों की अज्ञानता को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं। मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने इस पर तल्खी दिखाई।
‘अमर उजाला’ में मंगलवार को खबर छपने पर सरकार ने बीमा कंपनियों और बैंकों के इस खेल पर कड़ा संज्ञान लिया। मंगलवार को ही मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने बैंकों, बीमा कंपनियों, राजस्व, कृषि और बागवानी अधिकारियों की बैठक बुलाई। मुख्य सचिव इस योजना के स्वरूप से हैरान हुए। उन्होंने बीमा कंपनियों को दो टूक कहा कि इससे तो यह किसानों-बागवानों की हितैषी नहीं लग रही है।
ओलावृष्टि कवर नहीं सामान्य योजना में, सरकार हैरान
फसल बीमा का ठेका एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास है। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि ओलावृष्टि सामान्य बीमा पालिसी में कवर नहीं है। अलग से टॉप अप लेना होता है। इससे भी सरकार हैरान है।
किसानों को दावे पेश करने को, राजस्व विभाग को गिरदावरी करने को कहा
मुख्य सचिव ने जिलास्तरीय समितियों को नुकसान की विस्तृत आकलन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व विभाग को गिरदावरी पूरा करने को कहा। किसानों से असामयिक बर्फबारी, ओलावृष्टि और वर्षा से नुकसान के मुआवजे का दावा बैंकों, पंचायतों, कृषि और बागवानी विभाग से या स्वयं बीमा कं पनी को जमा करवाने का आग्रह किया।