कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकाले जा रहे मलबे का वन भूमि, नालों, खड्डों और गोविंद सागर झील में डंप करने के मामले में मुख्य अरण्यपाल बिलासपुर ने डीएफओ बिलासपुर से पांच दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। फोरलेन विस्थापित और प्रभावित समिति बिलासपुर ने डीएफओ से कई बार उक्त विषय पर आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, लेकिन जब समिति को जानकारी नहीं मिली तो इस मुद्दे को लेकर तत्कालीन मुख्य अरण्यपाल के पास अपील की गई। अपील का निपटारा करते हुए तत्कालीन अरण्यपाल ने फैसला सुनाया था कि जहां-जहां सड़क निर्माण कंपनी ने अवैध डंपिंग की है।
दो माह के अंदर उसकी एक विशेष रिपोर्ट तैयार करके अरण्यपाल के कार्यालय में दी जाए। डीएफओ बिलासपुर अरण्यपाल के आदेशों को अनेदखा करते रहे। जिस पर वर्तमान मुख्य अरण्यपाल ने यह कार्रवाई की है। इस संबंध में प्रार्थी ने सभी संबंधित रेंज वन अधिकारियों को भी रिपोर्ट दर्ज करवाई। उक्त समिति ने चैनेज नंबर 147 जमा 600 से चैनेज नंबर 151 जमा 100 और बरमाणा एसीसी सीमेंट फैक्टरी को दिए लिंक चैनेज नंबर 0 जमा 010 जमा 20 से 1 जमा 100 व 1 जमा 200 तक के रोड अलाइनमेंट प्लान की नियमानुसार मांग साल 2020 जून महीने में वनमंडलाधिकारी बिलासपुर के पास की थी। उपरोक्त कार्यालय की ओर से कार्रवाई न करने और रिकॉर्ड उपलब्ध न करवाने पर 25 जुलाई को अरण्यपाल कार्यालय में भी शिकायत दर्ज करवाई थी।