इसके अलावा कैलेंडर, डायरी आदि स्टेशनरी की सामग्री को छापने में भी फंड का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए। इससे सरकारी कोष को नुकसान पहुंचने की बात की गई। वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई यह जांच बेनतीजा रही। अब जयराम सरकार आने के बाद चूंकि राजनीति प्रेरित सभी मामलों को बंद करने का पहले ही फैसला हो गया था।
ऐसे में ब्यूरो ने भी एनएचएम को नोटिस देकर मामले से संबंधित दस्तावेज मांग लिए। हाल में मिशन की ओर से दस्तावेज के साथ एक जवाब भी भेजा गया है। इसमें बताया गया है कि कैलेंडर व अन्य सामग्री के प्रकाशन की वजह से कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। चूंकि, मिशन ने नुकसान न होने की बात कही है। ऐसे में ब्यूरो अब इस मामले की जांच को बंद करने की तैयारी कर रहा है।