सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग बहाल होते ही सेना ने भी राहत की सांस ली है। करीब छह माह बाद इसकी बहाली हुई है। ऐसे में इस मार्ग से इसी सप्ताह से देश की सरहद पर सैन्य रसद की सप्लाई शुरू हो जाएगी। मनाली-केलांग होते हुए लेह के लिए सेना के काफिले जल्द रवाना होंगे। सड़क खुलते ही कुल्लू और मनाली से तेल के टैंकर लेह के लिए रवाना हुए हैं।
लद्दाख के एमपी छेरिंग नामग्याल ने मंगलवार को हिमाचल और जम्मू कश्मीर की सीमा सरचू में पहुंचने पर इन टैंकरों को हरी झंडी दिखाकर आगे के लिए रवाना किया। कुछ दिन बाद सेना का काफिला इस रूट से जाना शुरू हो जाएगा। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि देश की हिफाजत को देखते हुए इस मार्ग का अलग महत्व है।
दिल्ली-लेह 1072 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में करीब 36 घंटे का समय लगता है। इसके अलावा टनल बन जाने के बाद मनाली-केलांग के बीच 46 किलोमीटर की दूरी भी कम हो जाएगी। हालांकि मनाली-लेह मार्ग खुल जाने की खबर से लेह का दीदार करने के लिए आने वाले पर्यटकों में मायूसी है। कोरोना वायरस के बीच लॉकडाउन के चलते न जाने कब तक यह पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा। कुछ नहीं कहा जा सकता है।
लेकिन सैन्य काफिले की इस रूट से आवाजाही रहेगी। उधर, एचआरटीसी केलांग डिपो के आरएम मंगल चंद मनेपा ने कहा कि पूर्व में मनाली-लेह मार्ग बहाल होते ही देश-विदेश के पर्यटक ऑनलाइन बस सीट की बुकिंग करवाते थे। इस बार लॉकडाउन के चलते मामला ठंडे बस्ते में है। उन्होंने कहा कि दिल्ली से लेह तक गत वर्ष प्रति सीट 1500 रुपये किराया लगता था। वहीं टैक्सी यूनियन का दिल्ली से लेह तक टैक्सी का किराया 45 हजार रुपये है।