चालान संबंधी अपीलों का निपटारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत होगा। निवारण प्राधिकारी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना होगा। शिकायतकर्ता को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाएगा। अधिकारी को कारणों सहित लिखित और तर्कसंगत आदेश देना होगा। चालान और शिकायत से संबंधित भौतिक तथा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे भविष्य में जांच के लिए पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन चालकों को मिलेगा जो चालान कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। यदि चालक को लगता है कि चालान गलत तथ्यों पर आधारित है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। किस अधिकारी के पास जाना है, यह स्तर अब स्पष्ट कर दिया गया है। इससे शिकायतकर्ता को संबंधित कार्यालय की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। यह व्यवस्था कोर्ट जाने से पहले प्रशासनिक स्तर पर शिकायत निवारण का मंच देती है।