हिमाचल में अवैध भवनों को नियमित करने की अधिसूचना जारी होते ही नक्शा बनाने के रेट में दो से ढाई गुना इजाफा हो गया है। दस हजार में बनने वाला भवन का नक्शा 25 से 30 हजार रुपये में बन रहा है। लूटखसोट का यह मामला सरकार के पास पहुंचा गया है। इतनी राशि बढ़ने से सरकार भी हैरत में है।
सरकार ने निजी प्लानरों पर नकेल कसने को टीसीपी कार्यालय और नगर निगम में सेल खोलने का फैसला लिया है। इसमें प्रदेश सरकार खुद नक्शे के रेट तय करेगी। इस सेल में उन निजी प्लानरों को पंजीकृत किया जाएगा, जो कम रेट पर जनता को यह सुविधा देगा।
नक्शा ऑनलाइन तैयार किया जा रहा है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एक नक्शे को बनाने में कम से कम चार या पांच दिन लगते हैं। अगर टीसीपी या नगर निगम की ओर से नक्शों पर ऑब्जेक्शन लगते हैं तो उसे भी उसी दिन ऑनलाइन दूर किया जा सकता है।
इतनी फीस होने से अवैध भवन मालिकों के होश उड़ गए हैं। बीते सोमवार को सचिवालय में हुई बैठक के बाद लोगों ने शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को इस बारे में अवगत करवाया है।
निजी प्लानरों की ओर से मनमाने दाम वसूलने का मामला ध्यान में आया है। ऐसे में सरकार विभाग में एक अलग से सेल खोलने पर विचार कर रही है, ताकि लोगों के सही रेट पर नक्शे बन सकें।
जहां तक ऑनलाइन नक्शे बनाने का सवाल है, लोग मैन्युली भी नक्शे बनाकर कार्यालय में जमा करवा सकते हैं। - सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री