सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे बेरोजगारों के लिए अच्छी खबर है। सरकारी स्कूलों में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सितंबर महीने के अंत तक प्रदेश को 3100 नए शिक्षक मिलेंगे। सीएंडवी के 1500, टीजीटी के 950 और जेबीटी के 600 पदों को भरने की प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रक्रिया तेज कर दी है।
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हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर बैचवाइज और पदोन्नति से इन पदों को भरेगा। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा मनमोहन शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। टीजीटी के 500 पद कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से भरे जाएंगे। बीते दिनों ही आयोग ने इन पदों के लिए ली गई परीक्षा का परिणाम घोषित किया है।
शेष 450 पद बैचवाइज और पदोन्नति से भरे जाएंगे। 1500 सीएंडवी के पद भी आयोग और बैचवाइज भरे जा रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जेबीटी के 600 पद भरने के लिए जिलावार पदों का आवंटन किया है। टेट की मेरिट के आधार पर जेबीटी शिक्षकों का चयन किया जा रहा है।
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किस जिले में भरे जाएंगे कितने पद
चयनित शिक्षकों को अनुबंध आधार पर 8910 रुपये मासिक वेतन मिलेगा। चयनित शिक्षकों को संबंधित जिलों के दुर्गम क्षेत्रों में पहली नियुक्ति दी जाएगी। बिना शिक्षक वाले स्कूलों और सिंगल टीचर वाले स्कूलों में पद भरने को प्राथमिकता दी जाएगी। कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और ऊना जिला को छोड़ अन्य जिलों में जेबीटी भर्ती की जा रही है।
जिला शिमला में सबसे अधिक 121 जेबीटी शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। मंडी में 115, चंबा में 111, सिरमौर में 91, बिलासपुर में 54, सोलन में 55, हमीरपुर में 27 और लाहौल स्पीति जिला में 26 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। टीजीटी, सीएंडवी और जेबीटी के
पद भरने से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चल रही शिक्षकों की कमी दूर होगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बजट भाषण में शिक्षा विभाग में रिक्त चल रहे सभी पदों को भरने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय भर्तियां कर रहा है।
शिक्षकों को अपमानित न कर कमियां दूर करे सरकार
शिक्षकों के खिलाफ बीते दिनों जिला कुल्लू के बंजार में की गई मुख्यमंत्री की टिप्पणी राजकीय अध्यापक संघ को रास नहीं आई है। शनिवार को संघ की नई कार्यकारिणी ने शिमला में प्रेस वार्ता कर शिक्षकों को अपमानित करने की जगह शिक्षा की गुणवत्ता
घटने की कमियां दूर करने को कहा है। दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए वीरेंद्र चौहान ने शिक्षा में गुणवत्ता लाने को सुझाव भी दिए हैं। कहा कि प्राइमरी कक्षाओं में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई के साथ नर्सरी क्लास शुरू होनी चाहिए। तीसरी कक्षा से ही विशेषज्ञ शिक्षक नियुक्त किए जाएं।
राजकीय अध्यापक संघ ने शिक्षा में गुणवत्ता के लिए सरकार को दिए हैं सुझाव
निजी स्कूलों में जो शिक्षक पढ़ाते हैं, उनमें अधिकांश कमीशन पास नहीं होते। कमीशन पास करने पर ये शिक्षक भी सरकारी स्कूलों में आते हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने में सक्षम हैं। सरकार को अपनी नीति बदलनी चाहिए।
उन्होंने गैर शिक्षण कार्यों को खराब परीक्षा परिणाम के लिए जिम्मेदार ठहराया। कहा कि शिक्षकों से ऑनलाइन छात्रवृत्ति, स्कूल शिक्षा बोर्ड के फार्म, एमआईसी फार्म, एमडीएम, एसओएस, मुफ्त वर्दी-किताबों के वितरण का काम लिया जा रहा है।
शिक्षकों के खिलाफ की गई मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की टिप्पणी पर भड़का संघ
कई स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद हैं। पांचवीं और आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा बंद होने से शिक्षा की गुणवत्ता घट रही है। सरकार इन पहलुओं पर गंभीरता से विचार करे तो सरकारी स्कूलों का स्तर बढ़ेगा। अगर तीसरी और चौथी कक्षा में ही टीजीटी की नियुक्ति होगी तो बच्चों का आधार मजबूत होगा।
संघ के महासचिव नरेश महाजन, वित्त सचिव मुकेश शर्मा, कैलाश ठाकुर, अजीत चौहान, महावीर कैंथला आदि भी मौजूद रहे। संघ ने सरकार की रि-इंप्लायमेंट नीति का विरोध किया है। कहा कि इस नीति से हजारों बेरोजगारों के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार को अगर किसी को लाभ देना ही है तो सेवानिवृत्ति आयु 60 साल कर देनी चाहिए।