पुजारली के स्वयं सहायता समूहों की सदस्य तैयार कर रही राखियां
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राखियों में कई तरह के डिजाइन किए हैं शामिल
हिम ईरा वेबसाइट से ऑनलाइन हो रही है बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। रक्षा बंधन को लेकर बाजार में सामान सजने लगा है। इस बार कुल्लू पट्टी से बनीं राखियां महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह और सर्व शक्ति ग्राम संगठन पुजारली की सदस्यों ने इस बार कुल्लू पट्टी से राखियां तैयार की हैं।
यह राखियां पारंपरिक राखी की तरह हैं और महिलाओं के सशक्तीकरण तथा आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक हैं। 9 अगस्त को मनाए जाने वाले रक्षा बंधन त्योहार के लिए हिमाचल के मुकाबले बाहरी राज्यों से इन राखियों की ज्यादा मांग आ रही है। यह राखियां कुछ अलग नजर आती हैं। इन राखियों को महिलाएं कपड़े सिलने वाली मशीनों में बनाकर तैयार करती हैं। इस पर फूल पत्तियों सहित कई डिजाइन हैं। यह राखियां ग्रामीण विकास विभाग की हिम ईरा वेबसाइट पर ऑनलाइन राखी बॉक्स के नाम से बिक रही हैं। इसमें कुमकुम, चावल, चंदन और शक्कर के छोटे पैकेट भी साथ दिए जाते हैं। हिम ईरा के अन्य उत्पाद भी इस बॉक्स में शामिल हैं।
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संगठन की हेड मधु कंवर ने बताया कि पूरे संगठन में करीब 80 महिलाएं शामिल हैं। इसमें चार महिलाएं बारी-बारी से राखियां बनाने का कार्य कर रही हैं। एक दिन में एक महिला 50 से अधिक राखियां बना देती हैं। इससे पहले वह सामान्य डोरी और मोती की राखी बनाती थीं लेकिन इस बार कुल्लू पट्टी का इस्तेमाल किया है। राखियां बनाने वाली महिलाओं में रीमा, रंजना और रीता भी शामिल हैं।
तीन हजार बॉक्स हिम ईरा को भेज चुके हैं संगठन
स्वयं सहायता समूह और राखियां बनाने वाले संगठन हिम ईरा को राखियों के तीन हजार से ज्यादा बॉक्स बिक्री के लिए भेज चुके हैं। इसमें एक बॉक्स का मूल्य 321 रुपये से तीन हजार रुपये तक निर्धारित किया है। न्यू शिमला में स्थित हिम ईरा के वेयर हाउस में इन राखियों की पैकिंग की जाती है। इसके बाद ऑर्डर मिलने पर इनकी ऑनलाइन डिलिवरी की जाती है।