वे नौवीं से 12वीं तक ट्यूशन के साथ डिफेंस, बैंकिंग, एसएससी की कोचिंग दे रहे हैं। कुछ गरीब बच्चे और दूरदराज से आने वाले तो राजू के पास ही घर में रह जाते हैं। दो से तीन माह तक कोचिंग के दौरान बच्चे फीस के बजाय उनकी देखभाल करते हैं।
इन दिनों आर्मी की लिखित परीक्षा के 15 युवाओं के बैच को राजू कोचिंग दे रहे हैं। इनमें एक युवा राजू के घर में ही रहता और गुरु दक्षिणा के रूप में गुरु की देखभाल करता है। राजू ज्योतिष शास्त्र के भी ज्ञाता हैं।
जमा दो पास राजू के पास कुंडली दिखाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। उन्होंने ज्योतिष शास्त्र की कोई विशेष पढ़ाई नहीं की, लेकिन सीखने की ललक के चलते इंटरनेट से और किताबों को पढ़कर राजू ज्योतिष शास्त्र में निपुण हो गए हैं।
हसन सकलानी उर्फ राजू का जन्म वर्ष 1981 में शेष कुमार और माता उर्मिला देवी के घर हुआ। दादी संतों देवी के लाडले राजू परिवार के इकलौते चिराग हैं। बहन बनिता की शादी हो चुकी है। \
परिवार आर्थिक रूप से तो तंग नहीं है, लेकिन आर्मी में अफसर बनने का सपना देखने वाले राजू आज कुदरत के दिए जख्मों से लड़ कर युवाओं को योग्य बना रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चार बच्चों से कोचिंग की शुरुआत की थी। आज संख्या 40 पार हो गई है। कहते हैं कि युवाओं के जुनून को रास्ता दिखाना ही अब जिंदगी का लक्ष्य है।
हॉफ मैराथन कार्यक्रम के सम्मान समारोह के लिए डीएसपी हितेश लखनपाल ने फोन पर आने का न्योता दिया। आज तक कभी किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। जब डीएसपी लखनपाल ने युवाओं को प्रेरित करने की बात कही तो मुझे हठ तोड़ना पड़ा।
कुदरत से मिले जख्म के बाद पहली दफा मिले सम्मान से बेहद खुश हूं। गरीब बच्चों से न ट्यूशन के पैसे लेता हूं न ही कोचिंग के। हां संपन्न अभिभावक और युवा जरूर ट्यूशन के पैसे देते हैं, लेकिन मेरा लक्ष्य पैसे नहीं युवा जनून को राह दिखाना है। सम्मान समारोह में उनके चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी।