भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने गुरुवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति, बढ़ते कर्ज, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, राजनीतिक नियुक्तियों और विपक्ष के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर सरकार पर कई आरोप लगाए।
राजेंद्र राणा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुक्खू को प्रदेश के इतिहास में ऐसे पांच "खिताब" मिले हैं, जिनमें सबसे अधिक कर्ज लेने, सबसे अधिक झूठ बोलने, राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने, मित्रों को लाभ पहुंचाने और उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री होने जैसे आरोप शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये आरोप जनता के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार की बजाय "मित्रों का सिंडिकेट" काम कर रहा है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास कुछ ऐसे लोगों का प्रभाव है, जिनके पास कोई संवैधानिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका दिखाई देती है।
राजनीतिक नियुक्तियों पर उठाए सवाल
राणा ने कहा कि सरकार विकास कार्यों की बजाय बड़ी संख्या में ओएसडी, सलाहकारों और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों पर सरकारी धन खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले राजनीतिक नियुक्तियां सीमित होती थीं, जबकि वर्तमान सरकार में इनकी संख्या अधिक है।
कर्ज और विकास कार्यों को लेकर सरकार पर निशाना
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर का कर्ज लिया गया है, लेकिन इसके अनुरूप विकास कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि सड़कों की स्थिति खराब है, कई पुल क्षतिग्रस्त हैं और हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वित्तीय मामलों का समय पर समाधान नहीं हो रहा है तथा सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है।