संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दिल्ली में छात्रावास की इमारत ढहने की घटना ने शिमला में भी चिंता बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) और सैकड़ों कोचिंग केंद्रों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। छात्रावासों में सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी बाहर रहते हैं। यह विद्यार्थी किराये के कमरों, निजी छात्रावासों और पीजी में रहने को मजबूर हैं।
शिमला में एचपीयू के अलावा कोटशेरा, आरकेएमवी और संजौली बड़े शिक्षण संस्थान हैं। इसके अलावा शहर में बहुत से कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई करने के लिए छात्र शिमला आते है। समरहिल, लॉन्गवुड और संजौली में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। कई भवनों में छोटे कमरों में अधिक विद्यार्थियों को रखा जाता है। इससे हवा, रोशनी और आवाजाही की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती। सबसे गंभीर सवाल भवन सुरक्षा को लेकर है। कई निजी पीजी और छात्रावास पुराने भवनों में चलते हैं। इनमें आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था की स्थिति की जांच जरूरी है। संकरी सीढ़ियां और सीमित निकासी मार्ग आपात स्थिति में बड़ा खतरा बन सकते हैं। भवन की क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को रखने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। एचपीयू की एसएफआई इकाई के अध्यक्ष मुकेश ने कहा कि ऐसे आवासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। एबीवीपी के परिसर सचिव अक्षय ने कहा कि शिमला में भी छात्रावासों का व्यापक सुरक्षा सर्वे जरूरी है। विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में सुरक्षित छात्रावास बढ़ाने की जरूरत भी है।
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संस्थान विद्यार्थी छात्रावास छात्रावास में विद्यार्थी