फैक्ट्री से तैयार किए गए कत्था को पाकिस्तान को निर्यात नहीं किया जाएगा। भारत में भी इसकी डिमांड अधिक है। इसे भारत में ही दवाइयों में इस्तेमाल किया जाएगा। सुरेश चड्ढा, एमडी महेश उद्योग गगरेट, ऊना
पान मसाले में कत्था का उपयोग
कत्था (काछ) का उपयोग पान के मसाले में किया जाता है। पाकिस्तान में लाखों किसान और गरीब लोग कत्था का उपयोग खाने के पान के इस्तेमाल करते हैं।
हिमाचल के दुर्गम क्षेत्र लाहौल घाटी में उत्पादित बीज आलू को अब कभी भी पाकिस्तान को निर्यात नहीं किया जाएगा। पुलवामा में भारतीय जवानों पर हुए आतंकी हमले के बाद सोलन ने टमाटर, सिरमौर ने अदरक, बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा ने कत्था की फसल को पाकिस्तान भेजने से पहले ही मना कर दिया है। इसी बीच लाहौल पोटेटो सोसायटी (एलपीएस) ने पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने का एलान कर दिया है।
पाकिस्तान ने पिछले कुछ अरसे से बीज आलू की मांग नहीं की है, लेकिन करीब ढाई दशक पूर्व लाहौल पोटेटो सोसायटी ने पाकिस्तान को 123 टन बीज आलू सप्लाई किया था। लाहौल घाटी में उत्पादित बीज आलू की देश में अपनी अलग पहचान है। पाकिस्तान ने भी यहां से नेफेड के माध्यम से बीज आलू की खरीदारी की थी। देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड त्रिपुरा मेघालय राज्यों को हर बार निर्यात किया जाता है।
जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के किसान भारी मात्रा में आलू की पैदावार कर देश के विभिन्न राज्यों को अपने सोसायटी के माध्यम से आपूर्ति करते हैं। दी लाहौल आलू उत्पादक संघ (एलपीएस) के चेयरमैन कमल सिंह ने बताया कि 1995-96 में पाकिस्तान की डिमांड पर नेफेड के माध्यम से 123 टन बीज आलू पाकिस्तान को निर्यात किया गया था। अब सोसायटी कभी भी पाकिस्तान की मांग को पूरा नहीं करेगी।