आम बजट का बेसब्री से सबको इंतजार था। उम्मीद थी कि राहत मिलेगी। नौकरी पेशा और प्रोफेशनल्स टैक्स स्लैब बढ़ने की आस लगाए थे। हर शख्स इस आस में था कि कुछ ऐसे प्रावधान होंगे जिससे महंगाई पर अंकुश लगेगा, कुछ बचत होगी, पर जिन्होंने
यह आस लगाई उन्हें मायूस ही होना पड़ा। बजट में टैक्स स्लैब तो बढ़ा नहीं, उस पर सर्विस टैक्स बढ़ने से लोगों की जेब पर बोझ जरूर बढ़ गया। केंद्रीय बजट पर कारोबारियों और गृहणियों ने अपनी राय अमर उजाला से सांझा की।
कारोबार को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने सातों दिन बाजार खुला रखने की घोषणा की है। यह कारोबारियों के लिए सकारात्मक कदम है, लेकिन सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी से सीधे महंगाई को बढ़ावा मिलेगा। सर्विस टैक्स बढ़ाए जाने से होटल का खाना, ठहरना और सफर सहित सब कुछ महंगा हो जाएगा। -इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष व्यापार मंडल शिमला
कर्मचारी वर्ग बजट से निराश: जोगटा
केंद्र सरकार के बजट से कर्मचारी वर्ग को निराशा ही हाथ लगी है। सातवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार ने बजट में कोई घोषणा नहीं की। क्लास थ्री और क्लास फोर कर्मचारियों को इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं दी गई। महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा ही है। कर्मचारी वर्ग इस बजट से पूरी तरह से निराश है। -एसएस जोगटा, प्रदेश हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ
इनकम टैक्स छूट की सीमा को न बढ़ा कर सरकार ने काले धन को बढ़ावा दिया है। इससे मध्यम वर्ग के लोग प्रभावित होंगे। सर्विस टैक्स बढ़ने से महंगाई बढ़ जाएगी। ऐसे में पेंशनर वर्ग को बजट में कुछ राहत मिलनी चाहिए थी। आयकर की छूट नहीं बढ़ाई गई और न बुजुर्ग पेंशनरों को मेडिकल जैसी सामाजिक सुरक्षा मिली। -सुभाष वर्मा, महासचिव, पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन
सिलेंडर 12 से घट कर 10 नहीं हुए, यह राहत
घरेलू सिलेंडरों की संख्या साल में 12 से घटा कर 10 करने की चर्चा थी लेकिन बजट में केंद्र सरकार ने सिलेंडरों की संख्या नहीं घटाई है यह राहत की बात है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए थे। सर्विस टैक्स बढ़ने से ब्यूटी पार्लर, मूवी टिकट, केबल टीवी महंगा हो गया है। -दीप्ति सूद, गृहणी
ज्वैलरी महंगी होना महिलाओं के लिए अच्छी खबर नहीं- बजट में ज्वैलरी महंगी कर दी गई है। महिलाओं को ज्वैलरी का हमेशा शौक रहता है। ऐसे में महिलाओं के लिए यह अच्छी घोषणा नहीं है। सर्विस टैक्स बढ़ने से हर चीज महंगी हो जाएगी। इसका असर हर परिवार पर पड़ेगा। - अनूपमा सूद, गृहणी
आंकड़ों का मायाजाल है बजट: महेश्वर
केंद्र सरकार का बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल है। पहले के कार्य क्रियान्वित हुए नहीं हैं, अगले सपने दिखाना सरकार ने शुरू कर दिए हैं। पिछले साल स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र ने 6 करोड़ शौचालय बनाने के लिए बजट का प्रावधान रखा
लेकिन अभी तक केवल 62 लाख शौचालय बने हैं। बजट में हो रही अनदेखी को लेकर रेल मंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखेंगे, जिसमें प्रदेश के विभिन्न कार्य योजनाओं के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने की मांग करेंगे। -महेश्वर सिंह, विधायक एवं हिलोपा अध्यक्ष
बजट में पूर्व सैनिकों की अनदेखी
बजट में पूर्व सैनिकों की अनदेखी की गई है। एक मजदूर 18 घंटे काम करता है, उसके हितों का पूर्व सैनिकों की अपेक्षा बेहतर ध्यान रखा गया है, जबकि जो सैनिक 24 घंटे देश की सरहदों पर तैनात रहते हैं, उनकी अनदेखी की गई है। -स्कॉड्रन लीडर बृज लाल धीमान, पेंशनर
रामपुर की समाज सेविका नीना शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार का बजट
किसानों की बेहतरी के लिए है। कॉस्मेटिक चीजें महंगी होने से गरीब को
ज्यादा फर्क नहीं पडे़गा। क्योंकि इन चीजों को ज्यादातर अमीर लोग ही उपयोग
करते हैं।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा: रामस्वरूप
सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो बजट पेश किया वह सुपर बजट है। पहली मर्तबा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ऐसा बजट पेश हुआ, जिसमें सभी वर्गों का विशेष ध्यान रखा गया।
यह बजट बशर्ते लोक लुभावना नहीं है मगर इस बजट से आम नागरिकों को राहत मिलेगी। इस बजट से देश के वह तमाम गांव सड़क सुविधा से जुड़ेंगे जो अभी तक नहीं जुड़ पाए हैं। इस बजट से अटल बिहारी वाजपेयी का वह सपना भी साकार होगा, जिसमें उन्होंने प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने का सपना देखा था।
पहाड़ी राज्य के विकास को गति देगा केंद्रीय बजट
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्री प्रो. एनएस बिष्ट ने केंद्र सरकार के बजट को हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के विकास को गति देने वाला करार दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि बजट में महंगाई से निपटने के लिए कोई ऐसी घोषणा नहीं जिससे तुरंत राहत मिले।
मगर मनरेगा जैसी योजनाओं के साथ ही कृषि विकास और सिंचाई के लिए बजट प्रावधान, पंचायती राज संस्थानओं और नगर निकायों के लिए बजट प्रावधान में कई गुणा अधिक प्रावधान किए जाने से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी, कृषि और बागवानी का विकास होगा। बजट दूरगामी सोच का होने से इसके परिणाम लंबे समय से अच्छे रहेंगे।