महिलाओं को खुद उठाना पड़ रहा है खर्च
आने जाने में हो जाता है एक हजार रुपये खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा तहसील की नौ पंचायतों की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के मकसद से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत क्योंथल कलस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) का गठन किया है। इसका कार्यालय जनेड़घाट में है, जहां पर हर महीने ग्राम संगठन और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों की दो बार बैठकें होती हैं। इसके लिए दूरदराज गांवों की महिलाएं घर के कार्यों को छोड़कर अपने खर्चे पर बैठकों में भाग लेने के लिए पहुंचती हैं।
ग्राम संगठन और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों ने बैठकों में भाग लेने के लिए यात्रा भत्ता देने की मांग उठाई है। सीएलएफ जनेड़घाट के अधीन 18 ग्राम संगठन (वीओ) और 271 स्वयं सहायता समूह हैं। इसमें 1776 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसमें मुख्य रूप से आचार, चटनी, डेयरी फार्मिंग और चीड़ की पतियों से विभिन्न प्रकार के आकर्षक उत्पाद तैयार करना शामिल हैं लेकिन अधिकांश महिलाएं गृहिणियां हैं। सीएलएफ से जुड़ी कई महिलाओं ने बताया कि जनेड़घाट के लिए सीधी बस सेवा नहीं होने के कारण महिलाओं को टैक्सी का किराया अदा करके बैठकों में शामिल होना पड़ता है। इसमें 500 रुपये तक का खर्च आता है। इसके अतिरिक्त महिलाओं को 250 रुपये शुल्क और दिन में भोजन के लिए 120 रुपये खर्च आता है। इस तरह से महिलाओं को एक बैठक में भाग लेने के लिए करीब एक हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। महिलाओं ने प्रदेश सरकार से बैठक में भाग लेने के लिए यात्रा भत्ते का प्रावधान करने की मांग की है। क्योंथल कलस्टर फेडरेशन की प्रधान अनिता शर्मा ने बताया कि बैठक में भाग लेने के लिए यात्रा भत्ता और भोजन का कोई प्रावधान नहीं है। कलस्टर की ओर सौ रुपये प्रति महिला भत्ता देने पर विचार किया जा रहा है, जोकि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।