विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी, बोले-मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं तो आंदोलन होगा तेज
विज्ञापन
वॉशरूम, कॉरिडोर की नहीं होती नियमित सफाई : मुकेश संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के विभिन्न बॉयज हॉस्टलों के छात्रों ने वीरवार को हॉस्टलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन में भाग लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पानी, मेस तथा साफ-सफाई जैसी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
एसएफआई के कैंपस सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील बना हुआ है। उन्होंने कहा कि छात्र नियमित रूप से फीस जमा कर रहे हैं लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्रों ने प्रशासन से हॉस्टलों में नियमित पानी की आपूर्ति, मेस व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई सुनिश्चित करने और आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है।
विज्ञापन
छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से हॉस्टलों में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई-कई दिनों तक नियमित पानी उपलब्ध नहीं होने से छात्रों को पीने, नहाने और दैनिक कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों के मौसम में स्थिति और अधिक खराब हो गई है। छात्रों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हॉस्टल मेस की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मेस में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और स्वच्छता का भी उचित ध्यान नहीं रखा जा रहा। छात्रों ने आरोप लगाया कि मेस फीस बढ़ाई जा रही है लेकिन सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई।
छात्रों ने हॉस्टलों में साफ-सफाई की बदहाल स्थिति को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि वॉशरूम, कॉरिडोर और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी फैल रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा टूटे फर्नीचर, खराब बिजली व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर भी छात्रों ने चिंता जताई।