शिमला शहर में गहराए जल संकट पर नगर निगम के पार्षदों ने भी मेयर, डिप्टी मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। निगम पार्षद सुशांत कपरेट और संजय परमार ने मेयर, डिप्टी मेयर से पूछा है कि शहर के लोगों को जब महीने में पानी की सप्लाई 10 दिन से भी कम दी जा रही है तो किस आधार पर पूरे महीने का बिल जारी किया जा रहा है।
पार्षदों ने बिना पानी की सप्लाई के बिल की वसूली को गैर कानूनी करार देते हुए इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का भी एलान कर दिया है। पार्षद सुशांत कपरेट का कहना है कि मेयर, डिप्टी मेयर शहर के लोगों को 24 घंटे सातों दिन पानी की सप्लाई का वादा कर नगर निगम की सत्ता पर काबिज हुए थे।
अब अपना चुनावी वादा भूल कर लोगों को गुमराह करने में जुटे हुए हैं। कपरेट ने मेयर, डिप्टी मेयर से सवाल किया है कि पिछले साल भी निगम को रोजाना 35 एमएलडी के करीब पानी की सप्लाई मिल रही थी और लोगों को भी पूरा पानी मिल रहा था।
इस बार भी इतना ही पानी मिल रहा है, तो फिर शहर की पब्लिक के हिस्से का पानी कहां गायब किया जा रहा है? कपरेट ने कहा है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए मेयर, डिप्टी मेयर निराधार बयानबाजी कर रहे हैं, जिसे अब सहन नहीं किया जाएगा।