किसान विरोधी कानूनों को लेकर संघर्षरत किसानों के समर्थन में गुरुवार को सीटू, हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एसएफआई और दलित शोषण मुक्ति मंच ने प्रदेश भर में प्रदर्शन किए। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, किसान सभा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर, महासचिव डॉ. ओंकार शाद, महिला समिति प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीना सिंह, सचिव फालमा चौहान, डीवाईएफआई प्रदेशाध्यक्ष अनिल मनकोटिया, सचिव चंद्रकांत वर्मा, एसएफआई प्रदेशाध्यक्ष रमन थारटा, सचिव अमित ठाकुर, दलित शोषण मुक्ति मंच संयोजक जगत राम व सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि मोदी व खट्टर की भाजपा सरकारें किसानों को कुचलने पर आमादा हैं।
कहा कि किसान आंदोलन को दबाने से जाहिर हो चुका है कि ये दोनों भाजपा सरकारें पूंजीपतियों घरानों के साथ हैं व उनकी मुनाफाखोरी को सुनिश्चित करने के लिए किसानों की आवाजा को दबाना चाहती हैं। मोदी सरकार के तीनों नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं। किसानों की फसलों को कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये विदेशी और देशी कंपनियों और बड़ी पूंजीपतियों के हवाले करने की साजिश रची जा रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के कानून को खत्म करने से जमाखोरी, कालाबाजारी व मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। कृषि कानूनों के बदलाव से बड़े पूंजीपतियों और देशी-विदेशी कंपनियों का कृषि पर कब्जा हो जाएगा और किसानों की हालत दयनीय हो जाएगी।