शहीद के नाम पर डेढ़ साल पहले हुई घोषणाएं पूरी न होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले में हिमाचल के कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के सियूंह गांव के हवलदार संजीवन राणा (51) आतंकियों से भिड़ते हुए सीने पर 5 गोलियां खाकर शहीद हुए थे।
शुक्रवार को शहीद की पत्नी पिंकी राणा की मौजूदगी में सिहुवा पंचायत के लोगों ने धर्मशाला में प्रदर्शन किया। साथ ही उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी भेजा। शहीद संजीवन राणा की पत्नी पिंकी रणा और ग्रामीणों का आरोप है कि शहीद की चिता पर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री और कबीना मंत्रियों ने कई घोषणाएं कीं, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने पर भी उक्त घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।
इससे ग्रामीणों में रोष है। उधर, प्रदर्शन में शामिल सिहुवा पंचायत प्रधान बिंदु राणा और कार्निक पाधा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जब शहीद के घर आए थे तो उन्होंने शहीद परिवार के सदस्य को नौकरी और शाहपुर कॉलेज का नाम शहीद के नाम रखने का एलान किया था। लेकिन, अभी तक न ही शहीद के परिवार के किसी भी सदस्य की सरकारी नौकरी लगी और न ही कॉलेज का नाम शहीद के नाम पर पड़ा।
इसके अलावा जहां पर शहीद संजीवन राणा का अंतिम संस्कार हुआ था। उस श्मशानघाट के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत हो गए हैं, लेकिन, जिस स्थान पर श्मशानघाट बनना है, उससे कुछ दूरी पर मंत्री और कुछ नेताओं के रिश्तेदारों के घर हैं। इसलिए वे वहां पर अब श्मशानघाट नहीं बनने दे रहे। इसलिए उनकी मांग है कि शहीद की चिता पर की गई घोषणाओं को शीघ्र अमलीजामा पहनाया जाए।
यदि ऐसा नहीं हुआ तो विस चुनावों में प्रदेश भर के शहीद परिवारों को एकत्रित कर काम में अड़ंगा फंसा रहे नेताओं के विपक्ष में प्रचार किया जाएगा। प्रदर्शन में सिहुवा पंचायत की वार्ड पंच सुषमा देवी, सपना देवी, नरेंद्र सहित ओंकार, मुकेश आदि मौजूद रहे। संजीवन राणा ने डोगरा रेजिमेंट से वर्ष 2009 में रिटायर होकर डिफेंस सिक्योरिटी फोर्स ज्वाइन की थी। वह दो साल पहले ही जम्मू से पठानकोट एयरबेस में पोस्ट हुए थे।