शहीद तिलक राज की पार्थिव देह दिल्ली से हवाई जहाज से शुक्रवार देर रात पठानकोट से नूरपुर पहुंचा दिया गया था। शनिवार को सीआरपीएफ के जवान साढ़े नौ बजे शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर उनके घर पहुंचे।
साढ़े नौ बजे शहीद का पार्थिव पहुंचते ही चीख पुकार के बीच लोगों ने लंबी लाइनों में शहीद के अंतिम दर्शन करना शुरू किए। करीब पौने दो घंटे तक अंतिम दर्शन हुए।
खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर, ज्वाली के विधायक अर्जुन ठाकुर, उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार और एसपी कांगड़ा दो गाड़ियों में बैठकर सुबह 10:26 बजे शहीद के घर पहुंचे।
सड़क पर खड़े युवकों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिए, जो अंतिम संस्कार तक जारी रहे। करीब 10:42 बजे पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, पूर्व विधायक अजय महाजन और केवल सिंह पठानिया के पहुंचे।
शहीद के घर निजी स्कूल के बच्चे भी 10:51 बजे पहुंचे और कतार में लगकर शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए खड़े हो गए। 10:58 बजे लोकसभा सांसद शांता कुमार भी शहीद के घर पहुंचे।
करीब एक घंटे बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और जेपी नड्डा 11:53 बजे पहुंचकर सीधे कमरे में शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए चले गए। अंतिम यात्रा 12:35 बजे शमशानघाट पहुंची। 1:32 बजे बड़े भाई बलदेव ने शहीद को मुखाग्नि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा सहित तमाम मंत्री और नेता जमीन पर बैठे रहे। सबसे बाद में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों ने शहीद को अंतिम विदाई दी।
गमगीन माहौल के बीच शहीद तिलक राज का ढाई साल का बड़ा बेटा वरुण अपने 22 दिन के रोते हुए छोटे भाई को चूम कर चुप करवाने की कोशिश करता रहा। घर के कमरे में पास में ही शहीद पिता तिलक राज का ताबूत खोलकर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। वरुण बार बार ताबूत को देखने की जिद कर रहा था। इसके बाद परिजन वरुण को मां और छोटे भाई के पास ले लाए। छोटा भाई रो रहा था। वरुण ने छोटे भाई को चूमा और चुप कराने की कोशिश की।